ट्रंप का बड़ा चुनावी दांव, रिपब्लिकन जीते तो हर अमेरिकी वयस्क को मिलेंगे करीब 5 लाख रुपये

0

वॉशिंगटन, 10 सितंबर2026 । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2026 के मिडटर्म चुनाव से पहले बड़ा आर्थिक वादा कर राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। ट्रंप ने कहा है कि अगर रिपब्लिकन पार्टी नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव में कांग्रेस के दोनों सदनों पर अपना नियंत्रण बरकरार रखती है, तो हर अमेरिकी वयस्क को 5,000 डॉलर दिए जाएंगे। भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग 5 लाख रुपये के बराबर है। ट्रंप ने इस प्रस्ताव को “Trump Dividend” नाम दिया है।

ट्रम्प ने यह बयान डलास में रिपब्लिकन कन्वेंशन को संबोधित करते हुए दिया। उन्होंने इसे ‘ट्रम्प डिविडेंड’ नाम दिया और कहा कि यह अमेरिका की ‘आर्थिक ताकत और सफलता’ की वजह से दिया जाएगा।

ट्रम्प ने ये भी कहा कि डिविडेंड की रकम अमेरिका में ही खर्च करनी होगी। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि इसके लिए पैसा कहां से आएगा, भुगतान का दायरा क्या होगा और रकम किस तरह बांटी जाएगी।

अमेरिका में करीब 26.98 करोड़ वयस्क हैं। अगर सभी को 5,000 डॉलर दिए जाएं तो कुल खर्च करीब 1.35 ट्रिलियन डॉलर यानी 128.25 लाख करोड़ रुपए होगा। यह रकम दुनिया के करीब 162 देशों की इकोनॉमी से ज्यादा है।

क्या हर वोटर को मिलेगा पैसा?

यहां ट्रंप के बयान को लेकर एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। ट्रंप ने हर वोटर को 5,000 डॉलर देने की बात नहीं कही, बल्कि हर अमेरिकी वयस्क को भुगतान की बात कही है। यानी प्रस्ताव को सीधे तौर पर चुनाव में मतदान करने वाले प्रत्येक व्यक्ति से जोड़ना सही नहीं होगा।

साथ ही यह अभी कोई लागू हो चुकी सरकारी योजना नहीं है। इसे अमल में लाने के लिए कानूनी और बजटीय प्रक्रिया की जरूरत होगी। रिपोर्टों के अनुसार राष्ट्रपति अकेले कार्यकारी आदेश के जरिए इस तरह का भुगतान शुरू नहीं कर सकते और इसके लिए कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक होगी।

मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रंप का बड़ा दांव

अमेरिका में 2026 के मिडटर्म चुनाव 3 नवंबर को होने हैं। इन चुनावों में कांग्रेस के दोनों सदनों का नियंत्रण दांव पर है। ऐसे समय में ट्रंप का 5,000 डॉलर का वादा रिपब्लिकन मतदाताओं को उत्साहित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

ट्रंप ने अपने भाषण में मतदाताओं से चुनाव को इस तरह देखने की अपील की कि मानो वह खुद भी बैलेट पर उम्मीदवार हों। इससे साफ है कि राष्ट्रपति मिडटर्म चुनाव अभियान में अपनी व्यक्तिगत लोकप्रियता और राजनीतिक प्रभाव को प्रमुख मुद्दा बना रहे हैं।

ट्रंप के इस प्रस्ताव को लेकर सबसे बड़ा सवाल इसकी वित्तीय व्यवहार्यता है। अमेरिका पहले से ही बड़े बजट घाटे और भारी राष्ट्रीय कर्ज से जूझ रहा है। ऐसे में 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा की संभावित लागत वाली योजना पर अर्थशास्त्रियों और नीति विशेषज्ञों की नजर है।

आलोचकों का कहना है कि अगर इतनी बड़ी राशि नए सरकारी खर्च के रूप में आती है तो इससे बजट घाटे और महंगाई पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन की ओर से भुगतान के संभावित स्रोत को लेकर अभी स्पष्ट विस्तृत योजना सामने नहीं आई है।

टैरिफ से जुड़े पुराने वादे की याद

ट्रंप इससे पहले भी अमेरिकी नागरिकों को सीधे आर्थिक लाभ देने वाले “डिविडेंड” का विचार सामने रख चुके हैं। उन्होंने पहले टैरिफ से मिलने वाले राजस्व के आधार पर 2,000 डॉलर तक के “tariff dividend” की बात की थी। हालांकि, उस प्रस्ताव को कांग्रेस में पर्याप्त समर्थन नहीं मिला और भुगतान लागू नहीं हुआ।

इस बार 5,000 डॉलर के प्रस्ताव ने इसलिए ज्यादा ध्यान खींचा है क्योंकि यह सीधे 2026 के मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के प्रदर्शन से जोड़ा गया है।

अब आगे क्या होगा?

ट्रंप के ऐलान के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि “Trump Dividend” वास्तव में किस रूप में लागू किया जा सकता है। इसके लिए भुगतान पाने वाले लोगों की पात्रता, आय सीमा, फंडिंग का स्रोत और कांग्रेस की मंजूरी जैसे कई मुद्दों पर स्पष्टता जरूरी होगी।

फिलहाल यह ट्रंप की ओर से किया गया चुनावी वादा है, कोई स्वीकृत या लागू भुगतान योजना नहीं। इसलिए अमेरिकी मतदाताओं को 5,000 डॉलर का भुगतान निश्चित रूप से मिलने वाला है, ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी। आने वाले हफ्तों में रिपब्लिकन पार्टी और ट्रंप प्रशासन इस प्रस्ताव की वित्तीय और कानूनी रूपरेखा स्पष्ट करते हैं या नहीं, इस पर सबकी नजर रहेगी।

Leave A Reply

Your email address will not be published.