DDMA बैठक में उपराज्यपाल की सख्ती, बाढ़ प्रबंधन में लापरवाही पर अधिकारियों को दी जवाबदेही की चेतावनी

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नई दिल्ली, 21  जुलाई 2026 । दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) की बैठक में राजधानी में संभावित बाढ़ और जलभराव की स्थिति को लेकर विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक के दौरान उपराज्यपाल (LG) ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मानसून के दौरान किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि तैयारी में कमी के कारण दिल्ली में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न होती है या नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

बैठक में बताया गया कि वर्ष 2024 में दिल्ली में 194 जलभराव वाली जगह चिह्नित की गई थीं, जो 2025 में घटकर 169 रह गईं। वहीं, 2026 में अब तक यह संख्या घटकर सिर्फ 34 रह गई है। 2024 से 2025 के बीच 53 स्थान ऐसे थे जहां दोबारा जलभराव हुआ था, जबकि 2025 से 2026 के बीच ऐसे स्थानों की संख्या घटकर सिर्फ 5 रह गई हैं। LG और CM ने माना कि पिछले दो वर्षों की तुलना में इस बार स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन अभी और काम करने की जरूरत है।

भारी बारिश की संभावना

मौसम विभाग की ओर से अचानक भारी बारिश की संभावना जताए जाने पर LG ने निर्देश दिया कि अल्पकालिक उपायों को पूरी गंभीरता से लागू किया जाए, जबकि दीर्घकालिक समाधान के लिए ड्रेनेज मास्टर प्लान पर काम जारी रखा जाए। उन्होंने कहा कि राजधानी में जलभराव की घटनाएं खत्म करने के लिए सभी विभागों को बेहतर तालमेल के साथ काम करना होगा और लापरवाही पर जवाबदेही तय करनी होगी।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि पिछले वर्षों में सामने आई समस्याओं से सबक लेते हुए इस बार समय रहते सभी तैयारियां पूरी की जाएं। जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त रखने, नालों की नियमित निगरानी, बाढ़ संभावित क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ाने और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को पूरी तरह सक्रिय रखने के निर्देश भी दिए गए। साथ ही नागरिकों को समय पर अलर्ट और आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।

DDMA की बैठक में विभिन्न विभागों से मानसून तैयारियों की प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और राहत एवं बचाव कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो। प्रशासन का उद्देश्य राजधानी में बाढ़ और जलभराव के प्रभाव को न्यूनतम रखना तथा लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

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