जींद, 18 जुलाई 2026 । हरियाणा के जींद जिले से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद से सोनीपत के लिए रवाना हुई। भारतीय रेलवे ने स्वच्छ और आधुनिक परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। रेलवे के असिस्टेंट लोको पायलट (ALP) गगनदीप सिंह ने देश की हाइड्रोजन संचालित ट्रेन का सफल संचालन कर इतिहास रच दिया है। इस उपलब्धि के साथ वह हाइड्रोजन ट्रेन चलाने वाले भारतीय रेलवे के पहले रेलकर्मी बन गए हैं। यह उपलब्धि रेलवे के हरित ऊर्जा (ग्रीन एनर्जी) और कार्बन उत्सर्जन कम करने के प्रयासों में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
गगनदीप ने शेयर किया अपना अनुभव
असिस्टेंट लोको पायलट गगनदीप सिंह ने हाइड्रोजन ट्रेन को चलाने का अनुभव शेयर करते हुए बताया कि इस चलाने के लिए हमें बहुत अच्छी ट्रेनिंग मिली है। चेन्नई से आए लोगों ने हमें इस ट्रेन के बारे में जानकारी दी है। यह 3200 हॉर्सपावर की ट्रेन है। इसमें 8 ट्रैवल कोच और 2 पावर कोच होंगे। इसमें मॉडर्न सेफ्टी इक्विपमेंट लगे हैं। आग लगने की स्थिति के लिए ऑटोमैटिक फायर एक्सटिंग्विशर लगाए गए हैं और इसमें 26 सेंसर हैं। यह बहुत अच्छा अनुभव है।
हाइड्रोजन ट्रेन पारंपरिक डीजल इंजनों की तुलना में अधिक पर्यावरण अनुकूल मानी जाती है। इसमें हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक का उपयोग किया जाता है, जिससे ऊर्जा का उत्पादन होता है और उत्सर्जन के रूप में मुख्य रूप से जलवाष्प (Water Vapour) निकलती है। इस तकनीक को भविष्य के टिकाऊ और स्वच्छ परिवहन का महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है।
गगनदीप सिंह की यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि भारतीय रेलवे के तकनीकी आधुनिकीकरण और नवाचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव भी है। रेलवे लगातार अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाकर ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, प्रदूषण कम करने और यात्रियों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हाइड्रोजन आधारित रेल सेवाओं का सफल विस्तार होता है, तो इससे भारत में हरित परिवहन को नई गति मिलेगी और रेलवे का कार्बन फुटप्रिंट कम करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी। आने वाले वर्षों में इस तकनीक के व्यापक उपयोग की संभावनाओं पर भी काम किया जा रहा है।