नई दिल्ली, 18 जुलाई 2026 । दिल्ली की न्यायिक व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने न्यायिक अधिकारी वीणा रानी को निलंबित कर दिया है। इससे पहले डिस्ट्रिक्ट जज विनय सिंघल के खिलाफ भी कार्रवाई की गई थी। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों ने न्यायिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज कर दी है।
दिल्ली छोड़ने की नहीं होगी अनुमति
15 जुलाई को जारी आदेश के मुताबिक, वीणा रानी का मुख्यालय प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज, साउथ-ईस्ट, साकेत का ऑफिस रहेगा। उन्हें सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना दिल्ली छोड़ने की अनुमति नहीं होगी। सस्पेंशन के दौरान उन्हें नियमों के तहत निर्वाह भत्ता और अन्य देय भत्ते मिलते रहेंगे। वहीं, डिस्ट्रिक्ट जज विनय सिंघल का सस्पेंशन 10 जुलाई को हाई कोर्ट की फुल कोर्ट ने मंजूर किया।
हाई कोर्ट द्वारा की गई यह कार्रवाई न्यायिक सेवा में पारदर्शिता, जवाबदेही और अनुशासन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, निलंबन किसी अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निष्कर्ष नहीं होता, बल्कि यह जांच प्रक्रिया के दौरान उठाया गया एक प्रशासनिक कदम होता है।
क्या है महिला पर आरोप
उनके खिलाफ विजिलेंस जांच के बाद यह कार्रवाई की गई। आरोप है कि उन्होंने कोर्ट ऑक्शनियर के रूप में ऐसे वकीलों की नियुक्ति की जो पात्र नहीं थे। साथ ही उन्होंने ऐसे न्यायिक आदेश भी पारित किए, जिनसे इन वकीलों को हाई कोर्ट के नियमों में तय सीमा से अधिक मानदेय और भुगतान मिला। यह मामला 20 अगस्त 2025 को एक कोर्ट ऑक्शनियर की शिकायत के बाद सामने आया था। इसके बाद चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय ने विजिलेंस जांच के आदेश दिए थे।
सूत्रों के अनुसार, संबंधित मामलों में आंतरिक जांच और प्रशासनिक प्रक्रिया जारी है। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल दिल्ली हाई कोर्ट की ओर से न्यायिक अधिकारियों के आचरण और सेवा संबंधी मानकों को लेकर सख्त रुख अपनाया जा रहा है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि न्यायपालिका में जवाबदेही और निष्पक्षता बनाए रखने के लिए समय-समय पर प्रशासनिक कार्रवाई आवश्यक होती है। ऐसे कदम न्यायिक संस्थाओं में जनता का विश्वास बनाए रखने और संस्थागत पारदर्शिता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं।