नई दिल्ली, 09 जुलाई 2026 । करीब 700 करोड़ रुपये के कथित मेडिकल सप्लाई घोटाले की जांच में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को बड़ा खुलासा हाथ लगा है। जांच में सामने आया है कि कई सरकारी अस्पतालों के लिए उनकी वास्तविक आवश्यकता या मांग के बिना ही बड़ी मात्रा में बेडशीट और अन्य चिकित्सा सामग्री की खरीद की गई। इससे सरकारी खरीद प्रक्रिया और वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
मंगलवार को राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज धीरज मोर ने तीन बड़े अधिकारियों की न्यायिक हिरासत 14 दिन के लिए बढ़ा दी। आरोपी हेल्थ सर्विसेज के पूर्व डायरेक्टर जनरल (DGHS) डॉ. वत्सला अग्रवाल, CPA के पूर्व डिप्टी कंट्रोलर ऑफ अकाउंट्स नीरज चोपड़ा और CPA के पूर्व हेड ऑफ ऑफिस डॉ. विनोद कुमार रंगा 20 जुलाई तक हिरासत में रहेंगे।
- ACB की ओर से पेश हुए चीफ पब्लिक प्रॉसिक्यूटर प्रमेंद्र कुमार ने आरोप लगाया कि पसंदीदा कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए खरीद के नियमों में जानबूझकर हेरफेर की गई।
- जांच में साधारण बैकग्राउंड वाले डायरेक्टरों से जुड़े 200 करोड़ रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन का पता चला है।
- इसके अलावा, एजेंसी ने बताया कि पेमेंट ऑर्डर तो मौजूद हैं, लेकिन इन टेंडरों से जुड़ी असली फाइलें गायब हो गई हैं।
- यह मामला गंभीर बीमारियों की दवाओं और अस्पताल के उपकरणों के लिए रखे गए सरकारी फंड के बड़े पैमाने पर गबन से जुड़ा है।
- ACB का आरोप है कि आरोपियों ने गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) का इस्तेमाल करने के बजाय सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) के जरिए अलग-अलग समझौतों के तहत खरीदारी की।
ACB के अनुसार, प्रारंभिक जांच में ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिनसे संकेत मिलता है कि कई अस्पतालों ने संबंधित सामग्री की मांग नहीं की थी, इसके बावजूद खरीद के आदेश जारी किए गए। जांच एजेंसी अब खरीद प्रक्रिया, टेंडर, भुगतान, आपूर्ति और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की विस्तृत जांच कर रही है।
जांच का दायरा बढ़ाते हुए एजेंसी रिकॉर्ड, फाइलों, बिलों और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन या वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित पक्षों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला सरकारी अस्पतालों में खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर बहस का विषय बन गया है। फिलहाल ACB की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएंगे।