मधुबनी , 03 जुलाई 2026 ।, 03 जुलाई 2026 । बिहार की राजधानी पटना की ऐतिहासिक पहचान माने जाने वाले घंटाघर को लेकर नया विवाद सामने आया है। जानकारी के अनुसार, इसकी ऊंचाई और विमान संचालन से जुड़े तकनीकी मानकों को लेकर एयरपोर्ट अथॉरिटी ने आपत्ति जताई है। बताया जा रहा है कि उड़ान सुरक्षा से जुड़े ‘3 डिग्री एप्रोच एंगल’ (Approach Surface) के मानकों के संदर्भ में घंटाघर की स्थिति का आकलन किया जा रहा है।
पटना की पहचान पर बड़े कद का खतरा
विशाल घड़ी, भारी-भारी सुइयों और घंटे के लिए विश्वस्तर पर दर्शनीय सचिवालय का घंटा घर इन दिनों अपने कद के लिए सरकार के सामने परेशानी बन गया है। घंटाघर के कद के कारण सरकारी महकमे की परेशानी इसलिए बढ़ गई है कि पायलट को पटना एयरपोर्ट पर हवाई जहाज को उतारने में काफी बाधा आ रही है। विभागीय जानकारी के अनुसार पटना जिला प्रशासन और एयरपोर्ट अथॉरिटी ने मंत्रिमंडल सचिवालय को प्रस्ताव भेजते यह आग्रह किया है कि सचिवालय स्थित टावर की ऊंचाई को कम किया जाए ताकि हमारे पायलट पूर्ण सुरक्षा के साथ हवाई जहाज उतार सकें।
तकनीकी मुश्किलें क्या हैं? जानिए
एयरपोर्ट अथॉरिटी ने तकनीकी मुश्किलों के हवाले से कहा कि हवाई जहाज के लैंडिंग के लिए जो सुरक्षा मानक चाहिए उसमें सचिवालय का घंटाघर बाधा का काम कर रहा है। इस घंटाघर के कद के कारण रनवे का करीब 134 मीटर हिस्सा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। नतीजा ये होता है कि बड़े विमानों को उतारने में काफी मुश्किलें आती हैं। इन मुश्किलों का एक ही उपाय है कि सचिवालय घंटाघर की ऊंचाई को लगभग 17.5 मीटर छोटा किया जाए। एविएशन नियम भी घंटाघर के कद के कारण पूरा नहीं हो पा रहा है। दरअसल कोई भी फ्लाइट लैंडिंग के वक्त लगभग 3 डिग्री के ग्लाइड पाथ पर होनी चाहिए, लेकिन पटना एयरपोर्ट के पास मौजूद इस टावर की ऊंचाई के कारण पायलटों को तय मानक से ज्यादा एंगल पर उतरना पड़ रहा है। अभी विमान करीब 3.25 से 3.5 डिग्री के झुकाव पर लैंड कर रहे हैं। यह काफी रिस्की होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हवाई अड्डों के आसपास मौजूद ऊंची संरचनाओं का मूल्यांकन विमानों के सुरक्षित टेकऑफ और लैंडिंग को ध्यान में रखते हुए किया जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत संबंधित एजेंसियां यह जांच कर रही हैं कि घंटाघर की ऊंचाई मौजूदा विमानन सुरक्षा मानकों के अनुरूप है या नहीं।
वहीं, स्थानीय लोगों और विरासत संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि घंटाघर पटना की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर है, इसलिए किसी भी निर्णय में इसकी विरासत को सुरक्षित रखने का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। फिलहाल मामले में संबंधित विभागों के बीच तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर विचार-विमर्श जारी है तथा अंतिम निर्णय आधिकारिक जांच और आवश्यक अनुमतियों के बाद ही लिया जाएगा।