बांका में शिक्षकों के लिए नई व्यवस्था: ई-शिक्षा कोष से होगी उपस्थिति दर्ज

तीन बार देर से आने या जल्दी जाने पर कटेगा एक दिन का वेतन

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बांका, 02 जुलाई 2026 । बिहार के बांका जिले में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की उपस्थिति और कार्य अनुशासन को लेकर नई व्यवस्था लागू की गई है। अब शिक्षकों का वेतन ई-शिक्षा कोष (e-Shiksha Kosh) पोर्टल पर दर्ज डिजिटल उपस्थिति के आधार पर जारी किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य विद्यालयों में समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित करना और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है।

बीईओ और प्रधानाध्यापकों से 24 घंटे में मांगी गई रिपोर्ट

इस संबंध में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) संजय कुमार यादव ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों (बीईओ) और चिह्नित मध्य विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को 24 घंटे के भीतर शिक्षकों की उपस्थिति रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। साथ ही बीईओ को अपने क्षेत्र के सभी शिक्षकों की ई-शिक्षा कोष पर दर्ज हाजिरी का सत्यापन कर प्रमाण पत्र भी जमा करना होगा। इसके बाद ही जून माह के वेतन भुगतान की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

‘मार्क ऑन ड्यूटी’ दर्ज की गई उपस्थिति मान्य नहीं

शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि बिना सक्षम विभागीय या वरीय अधिकारी की अनुमति के ‘मार्क ऑन ड्यूटी’ दर्ज की गई उपस्थिति मान्य नहीं होगी। ऐसे मामलों में संबंधित शिक्षक को अनुपस्थित मानकर उस दिन का वेतन काटा जाएगा। इसके अलावा यदि कोई शिक्षक किसी अन्य की फोटो या अनुचित तरीके से उपस्थिति दर्ज करने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ अलग से विभागीय कार्रवाई की जाएगी।

नई व्यवस्था के अनुसार, यदि कोई शिक्षक तीन बार निर्धारित समय से देर से स्कूल पहुंचता है या निर्धारित समय से पहले विद्यालय छोड़ता है, तो इसे एक दिन की अनुपस्थिति के बराबर माना जाएगा और उसके वेतन से एक दिन का वेतन काटा जाएगा। जिला शिक्षा विभाग ने सभी विद्यालयों को इस नियम का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए हैं।

आदेश से शिक्षकों के बीच हलचल

जिले में यह आदेश जारी होते ही शिक्षकों के बीच हलचल मच गई है। नियमित रूप से देर से विद्यालय पहुंचने या ‘मार्क ऑन ड्यूटी’का सहारा लेने वाले शिक्षक अब वेतन कटौती की आशंका से चिंतित हैं और विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगाने लगे हैं।

प्रशासन का कहना है कि इस कदम से शिक्षकों की नियमित उपस्थिति बढ़ेगी, पढ़ाई का समय प्रभावित नहीं होगा और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। साथ ही डिजिटल निगरानी प्रणाली के माध्यम से उपस्थिति रिकॉर्ड अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जाएगा।

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