रेनू भाटिया के बयान पर नर्सिंग स्टाफ का विरोध, बोले- ‘हमें बदनाम करना बंद करें, असली जिम्मेदारों पर हो कार्रवाई’

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पंजाब , 09 जून्‌ 2026 । रेनू भाटिया के हालिया बयान को लेकर स्वास्थ्य क्षेत्र में विवाद गहराता नजर आ रहा है। बयान के विरोध में नर्सिंग स्टाफ ने प्रदर्शन करते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की और कहा कि किसी भी घटना या व्यवस्था संबंधी कमी के लिए पूरे नर्सिंग समुदाय को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि तथ्यों के आधार पर जांच हो और वास्तविक जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

हरियाणा नर्सिंग एसोसिएशन ने पूरे प्रदेश में सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक हड़ताल की कॉल ली है। इसी कड़ी में कुरुक्षेत्र के LNJP अस्पताल में भी नर्सिंग स्टाफ 2 घंटे की हड़ताल पर रहा। स्टाफ नर्सों ने आरोप लगाया कि सारी कार्रवाई हमारे ऊपर डालने या किसी को बचाने के लिए की जा रही है। हमें नहीं पता कि डॉक्टर शैली को किसने नियुक्त किया था, लेकिन हम दिन-रात उस बच्ची को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

प्रदर्शन में शामिल नर्सिंग कर्मचारियों का कहना था कि वे स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं और कठिन परिस्थितियों में भी मरीजों की देखभाल के लिए लगातार कार्य करते हैं। उनका आरोप है कि कुछ बयानों के कारण नर्सिंग पेशे की छवि को नुकसान पहुंच रहा है और समाज में गलत संदेश जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि किसी मामले में लापरवाही हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन बिना ठोस निष्कर्ष के पूरे स्टाफ को दोषी ठहराना उचित नहीं है।

नर्सिंग स्टाफ ने यह भी कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों में कई स्तरों पर प्रशासनिक और प्रबंधन संबंधी चुनौतियां होती हैं, जिनकी जिम्मेदारी केवल नर्सों पर नहीं डाली जा सकती। प्रदर्शनकारियों ने मांग उठाई कि मामले की पूरी सच्चाई सामने लाई जाए और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

इस मुद्दे को लेकर स्वास्थ्य कर्मियों और संबंधित संगठनों में भी चर्चा तेज हो गई है। कई कर्मचारी संगठनों ने नर्सिंग स्टाफ के समर्थन में आवाज उठाते हुए कहा कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पक्षों को सुना जाना चाहिए। उनका मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े मामलों में संतुलित और जिम्मेदार बयानबाजी आवश्यक है।

विशेषज्ञों का कहना है कि संवेदनशील मामलों में तथ्यों की पुष्टि के बिना किसी वर्ग विशेष को दोषी ठहराने से कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित हो सकता है। इसलिए निष्पक्ष जांच और पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से ही जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

फिलहाल नर्सिंग स्टाफ का प्रदर्शन चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के अगले कदम पर है, जो इस विवाद को सुलझाने और मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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