उद्योग निवेश को बढ़ावा: 30 दिनों में मंजूरी नहीं मिली तो स्वतः मिलेगी ‘डीम्ड क्लीयरेंस’, नई नीति से कारोबार को राहत

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बिहार , 09 जून्‌ 2026 । बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को घोषणा की कि औद्योगिक एवं निवेश संबंधी सभी आवश्यक मंजूरियां अब 30 दिनों के भीतर देना अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि संबंधित विभाग या प्राधिकरण तय समय-सीमा के भीतर कोई निर्णय नहीं लेता है, तो आवेदन को स्वतः स्वीकृति प्रदान कर दी जाएगी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य निवेशकों को अनावश्यक देरी, जटिल प्रक्रियाओं और प्रशासनिक बाधाओं से राहत प्रदान करना है। लंबे समय से उद्योग जगत की मांग रही है कि परियोजनाओं की मंजूरी के लिए एक पारदर्शी और समयबद्ध प्रणाली विकसित की जाए, ताकि निवेश संबंधी निर्णय तेजी से लागू हो सकें।

नई नीति के तहत विभिन्न विभागों की स्वीकृतियों को एकीकृत करने और सिंगल विंडो सिस्टम को अधिक प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया है। इससे निवेशकों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम होगी और आवेदन प्रक्रिया अधिक सरल बन सकेगी। सरकार का मानना है कि इससे राज्य में नए उद्योगों की स्थापना को गति मिलेगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

विशेषज्ञों के अनुसार, ‘डीम्ड क्लीयरेंस’ जैसी व्यवस्था निवेशकों का विश्वास बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। जब उद्योगों को यह भरोसा होता है कि उनकी परियोजनाएं अनिश्चितकाल तक फाइलों में नहीं अटकेंगी, तो निवेश का माहौल अधिक अनुकूल बनता है। इससे घरेलू और विदेशी दोनों प्रकार के निवेशकों को आकर्षित करने में मदद मिल सकती है।

उद्योग संगठनों ने भी इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि समयबद्ध मंजूरी प्रणाली से परियोजनाओं की लागत कम होगी, व्यवसाय शुरू करने में लगने वाला समय घटेगा और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। साथ ही इससे राज्य की ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ रैंकिंग में भी सुधार की संभावना है।

सरकार को उम्मीद है कि इस नई व्यवस्था से औद्योगिक विकास को नई दिशा मिलेगी, निवेश बढ़ेगा और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के अवसर पैदा होंगे। आने वाले समय में इस नीति का प्रभाव राज्य की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक परिदृश्य पर स्पष्ट रूप से देखने को मिल सकता है।

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