टिहरी, 27 जुलाई 2026 । मणिका राणा भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) से जुड़ी एक पदाधिकारी रही हैं, जो हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के दौरान बनाई गई एक रील को लेकर विवादों में आ गईं। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद पार्टी ने मामले का संज्ञान लिया और अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें उनके संगठनात्मक पद से हटा दिया। इस घटनाक्रम के बाद मणिका राणा का नाम राजनीतिक और सोशल मीडिया दोनों जगह चर्चा का विषय बन गया है।
आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया
बीते दिनों मणिका राणा जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के आंदोलन में शामिल हुईं। उनका कहना है कि उन्होंने आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया और उन परिवारों की आवाज बनने का प्रयास किया, जिन्होंने अपने बच्चों को खोया है। आंदोलन की प्रमुख मांगें पूरी हुईं, जो लोकतंत्र की जीत है। मणिका ने कहा कि सरकार ने देर से ही सही, लेकिन सही निर्णय लिया और इसके लिए वह सरकार की सराहना करती हैं। उन्होंने कहा कि सत्य के पक्ष में खड़े होने के कारण यदि उन्हें किसी पद या संगठनात्मक जिम्मेदारी से हाथ धोना पड़े, तो भी वह पीछे नहीं हटेंगी।
जानकारी के अनुसार, जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के दौरान मणिका राणा द्वारा बनाई गई रील सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुई। वीडियो को लेकर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं, जिसके बाद भारतीय जनता युवा मोर्चा ने इसे संगठनात्मक अनुशासन से जुड़ा मामला मानते हुए कार्रवाई की। पार्टी का कहना है कि संगठन के पदाधिकारियों से सार्वजनिक आचरण और जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा की जाती है।
इस मामले के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई। एक वर्ग ने पार्टी के फैसले का समर्थन करते हुए इसे अनुशासन बनाए रखने की कार्रवाई बताया, जबकि कुछ लोगों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नजरिए से भी देखा। हालांकि, पार्टी की ओर से स्पष्ट किया गया कि कार्रवाई संगठन के आंतरिक नियमों और अनुशासन के आधार पर की गई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डिजिटल और सोशल मीडिया के दौर में सार्वजनिक मंचों पर साझा की गई सामग्री नेताओं और पदाधिकारियों की छवि के साथ-साथ संगठन की प्रतिष्ठा को भी प्रभावित कर सकती है। ऐसे मामलों में राजनीतिक दल अक्सर अपने आंतरिक नियमों के अनुसार निर्णय लेते हैं।