हरियाणा में खाद वितरण व्यवस्था में बड़ा बदलाव, अब QR कोड और आधार सत्यापन के बाद ही मिलेगी उर्वरक

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हरियाणा , 04 जून्‌ 2026 । हरियाणा सरकार ने किसानों को खाद वितरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी की है। इसके तहत अब किसानों को उर्वरक प्राप्त करने के लिए QR कोड आधारित प्रणाली और आधार सत्यापन प्रक्रिया से गुजरना होगा। सरकार का मानना है कि इस कदम से खाद की कालाबाजारी, फर्जी खरीद और अनियमित वितरण जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।

हरियाणा में यह उत्तर प्रदेश से सटे यमुना नगर तथा राजस्थान से सटे रेवाड़ी तथा महेंद्रगढ़ में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जा रहा है। इन जिलों का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि यहां खाद वितरण में अनियमितताओं और कालाबाजारी की सबसे अधिक शिकायतें सामने आ रही थीं।

नई व्यवस्था के अनुसार, खाद खरीदने वाले किसानों की पहचान डिजिटल माध्यम से सत्यापित की जाएगी। आधार आधारित प्रमाणीकरण और QR कोड स्कैनिंग के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उर्वरक वास्तविक किसानों तक ही पहुंचे। इससे सरकार को वितरण प्रक्रिया की निगरानी करने और यह पता लगाने में भी आसानी होगी कि किस क्षेत्र में कितनी खाद की मांग और आपूर्ति हो रही है।

कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में कई बार खाद की कृत्रिम कमी, जमाखोरी और अनधिकृत बिक्री की शिकायतें सामने आई थीं। कुछ मामलों में ऐसे लोगों द्वारा भी खाद खरीदे जाने की आशंका जताई गई जो कृषि गतिविधियों से सीधे जुड़े नहीं थे। नई डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य ऐसी अनियमितताओं को रोकना और जरूरतमंद किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीकों का उपयोग बढ़ाने से सरकारी योजनाओं और संसाधनों का लाभ लक्षित लाभार्थियों तक अधिक प्रभावी तरीके से पहुंचाया जा सकता है। QR कोड और आधार सत्यापन आधारित प्रणाली से खाद वितरण का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप से उपलब्ध रहेगा, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगी।

हालांकि कुछ किसान संगठनों का कहना है कि नई व्यवस्था लागू करते समय यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि तकनीकी समस्याओं के कारण किसानों को परेशानी न हो। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी, बायोमेट्रिक सत्यापन और डिजिटल साक्षरता जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्थाएं भी जरूरी होंगी।

सरकार का दावा है कि इस नई प्रणाली से खाद वितरण अधिक सुव्यवस्थित होगा, वास्तविक किसानों को प्राथमिकता मिलेगी और कृषि इनपुट की उपलब्धता को लेकर पारदर्शिता बढ़ेगी। आने वाले समय में यह मॉडल अन्य कृषि योजनाओं और सब्सिडी वितरण प्रणालियों में भी लागू किया जा सकता है।

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