चाबहार पोर्ट पर बड़ा संकेत: भारत अपनी हिस्सेदारी ईरानी कंपनी को सौंप सकता है

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नई दिल्ली, 25 अप्रैल 2026 । ईरान स्थित रणनीतिक चाबहार पोर्ट को लेकर एक अहम खबर सामने आ रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत इस पोर्ट में अपनी हिस्सेदारी एक ईरानी कंपनी को सौंपने पर विचार कर सकता है। यह कदम क्षेत्रीय भू-राजनीति और व्यापारिक समीकरणों पर बड़ा असर डाल सकता है।

भारत ईरान के चाबहार पोर्ट में अपनी हिस्सेदारी ईरानी कंपनी को सौंप सकता है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम अस्थायी तौर पर उठाया जा सकता है, ताकि अमेरिका के प्रतिबंधों से मिली छूट खत्म होने के बाद भी काम जारी रह सके।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का इस पोर्ट में ₹1100 करोड़ का निवेश है। भारत सरकार इस मुद्दे पर अमेरिका और ईरान दोनों से अलग-अलग बातचीत कर रही है। रिपोर्ट के मुताबिक यह बातचीत बेहद संवेदनशील है और इसमें शामिल अधिकारियों ने पहचान उजागर करने से इनकार किया है।

भारत को नवंबर 2025 में छह महीने की छूट मिली थी, जिससे चाबहार पोर्ट पर बिना रुकावट काम होता रहा। यह छूट इस महीने खत्म हो रही है।

भारत ने चाबहार पोर्ट को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार के रूप में विकसित किया था। यह परियोजना पाकिस्तान को बायपास करते हुए व्यापारिक मार्ग प्रदान करती है, जिससे भारत की रणनीतिक स्थिति मजबूत होती है।

हालांकि, हाल के वर्षों में वैश्विक प्रतिबंधों, आर्थिक चुनौतियों और धीमी प्रगति के कारण इस परियोजना की गति प्रभावित हुई है। ऐसे में भारत के लिए निवेश और संचालन को लेकर नई रणनीति बनाना जरूरी हो गया है। माना जा रहा है कि हिस्सेदारी ट्रांसफर करने का फैसला इन्हीं परिस्थितियों के चलते लिया जा सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह कदम उठाया जाता है, तो इससे भारत-ईरान संबंधों और क्षेत्रीय व्यापार नेटवर्क पर प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही, यह भी देखना होगा कि भारत अपने रणनीतिक हितों को कैसे संतुलित करता है।

फिलहाल इस विषय पर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है, लेकिन यह मामला आने वाले समय में भारत की विदेश नीति और व्यापारिक रणनीति के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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