चांदी में बड़ी गिरावट: ₹9,658 टूटकर ₹2.36 लाख प्रति किलो पर पहुंची, निवेशकों की बढ़ी चिंता

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नई दिल्ली, 10 जून्‌ 2026 । कीमती धातुओं के बाजार में चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। चांदी का भाव ₹9,658 की भारी कमी के साथ गिरकर ₹2.36 लाख प्रति किलोग्राम पर आ गया है। इस तेज गिरावट ने निवेशकों, कारोबारियों और सराफा बाजार से जुड़े लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव की वजह से आज यानी 10 जून को सोने-चांदी के दाम में गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम आज 4,090 रुपए गिरकर 1.48 लाख रुपए हो गया है। वहीं, 1 किलो चांदी की कीमत 9,658 रुपए कम होकर 2.36 लाख रुपए पर आ गई है।

31 मई को चांदी की कीमत 2.63 लाख रुपए थी। यानी सिर्फ 10 दिनों में ही ये 27 हजार रुपए सस्ती हो चुकी है। वहीं इस दौरान सोने की कीमत 8 हजार रुपए कम हुई है। एक्सपर्ट्स के अनुसार जियो पॉलिटिकल टेंशन के चलते लोग मार्केट से पैसा निकालकर अपने पास कैश रख रहे हैं।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव, निवेशकों की बदलती रणनीति और वैश्विक आर्थिक संकेतकों का असर घरेलू बाजार पर भी देखने को मिल रहा है। इसी वजह से चांदी की कीमतों में अचानक बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

चांदी का उपयोग केवल निवेश के लिए ही नहीं, बल्कि आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर किया जाता है। इसलिए इसकी कीमतों में होने वाले बदलाव का प्रभाव कई उद्योगों और व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में गिरावट के दौरान कुछ निवेशक इसे खरीदारी के अवसर के रूप में देख सकते हैं, जबकि अल्पकालिक निवेश करने वाले लोगों में चिंता बढ़ सकती है। बाजार की दिशा आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, डॉलर की मजबूती और औद्योगिक मांग पर निर्भर करेगी।

सराफा कारोबारियों के अनुसार, कीमतों में गिरावट के बाद खुदरा ग्राहकों की रुचि बढ़ सकती है, खासकर त्योहारों और शादी-विवाह के सीजन को देखते हुए। हालांकि निवेशकों को बाजार की अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए सोच-समझकर निर्णय लेने की सलाह दी जा रही है।

फिलहाल चांदी के भाव में आई इस बड़ी गिरावट ने सराफा बाजार में हलचल बढ़ा दी है। अब निवेशकों और कारोबारियों की नजर अंतरराष्ट्रीय बाजार के अगले संकेतों पर टिकी हुई है, जो आगे की कीमतों की दिशा तय करेंगे।

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