बांदा में डॉक्टर की कथित लापरवाही: मासूम की जिंदगी पर भारी, मेडिकल प्रोफेसर के खिलाफ FIR
बांदा , 14 अप्रैल 2026 । उत्तर प्रदेश के बांदा से एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जहां डॉक्टर की कथित लापरवाही ने एक 5 साल की बच्ची की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। आरोप है कि इलाज में की गई बड़ी चूक के कारण मासूम स्थायी रूप से दिव्यांग हो गई। इस मामले में मेडिकल कॉलेज के एक प्रोफेसर के खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है।
घटना की शुरुआत दिसंबर 2025 में हुई थी। शहर कोतवाली क्षेत्र के पडुयी गांव के रहने वाले अनिल कुमार की 5 साल की बेटी छत से गिर गई थी, जिससे उसके बाएं पैर की हड्डी टूट गई थी। पिता अपनी मासूम बेटी को इलाज के लिए उम्मीद के साथ रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज ले गए। उन्हें क्या पता था कि यहां उनकी बेटी का जीवन हमेशा के लिए बदलने वाला है। 29 दिसंबर को जब डॉक्टरों ने ऑपरेशन का प्लान बनाया और बच्ची को ऑपरेशन थिएटर ले गए, तो उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ। अपनी लापरवाही को छिपाने के लिए डॉक्टरों ने आनन-फानन में बच्ची को हायर सेंटर (लखनऊ) रेफर कर दिया और परिजनों से कहा कि बच्ची की हालत खतरे में है।
परिजनों ने बच्ची को तुरंत लखनऊ के एक अस्पताल में भर्ती कराया। वहां के डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि गलत इलाज के कारण संक्रमण इतना ज्यादा फैल चुका है कि बच्ची की जान बचाने के लिए पैर काटना ही एकमात्र रास्ता है। अंततः 5 साल की मासूम का पैर काट दिया गया, जिससे वह जीवन भर के लिए दिव्यांग हो गई।
परिजनों के अनुसार, बच्ची को सामान्य स्वास्थ्य समस्या के चलते अस्पताल लाया गया था, लेकिन उपचार के दौरान डॉक्टरों की लापरवाही सामने आई। आरोप है कि गलत इलाज या प्रक्रिया में हुई चूक के चलते बच्ची की स्थिति बिगड़ गई और बाद में उसे गंभीर शारीरिक नुकसान झेलना पड़ा। घटना के बाद परिवार ने न्याय की मांग को लेकर विरोध जताया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साथ ही, स्वास्थ्य विभाग ने भी इस पूरे प्रकरण की आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि लापरवाही किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में इलाज की गुणवत्ता और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मेडिकल लापरवाही के मामलों में सख्त कार्रवाई और पारदर्शी जांच बेहद जरूरी है, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
प्रशासन का कहना है कि जांच के आधार पर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, परिवार अब बच्ची के इलाज और पुनर्वास के लिए भी सरकारी सहायता की मांग कर रहा है।