पंजाब में LPG संकट का देसी समाधान—बिना सिलेंडर ‘जुगाड़’ से जल रहा चूल्हा, नवाचार या खतरा?

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मोगा ,  06 अप्रैल 2026 । पंजाब में LPG सिलेंडर की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति से जुड़ी दिक्कतों के बीच लोगों ने एक बार फिर अपनी जुगाड़ तकनीक का सहारा लिया है। कई इलाकों में ऐसे तरीके सामने आए हैं, जहां बिना पारंपरिक LPG सिलेंडर के ही चूल्हा जलाया जा रहा है। इस देसी समाधान को लेकर जहां कुछ लोग इसे किफायती और उपयोगी बता रहे हैं, वहीं विशेषज्ञ इसे संभावित खतरे के रूप में देख रहे हैं।

किसान निर्मल सिंह ने वर्ष 2011 में मात्र 20 हजार रुपये की लागत से अपने घर में बायोगैस प्लांट स्थापित किया था। इस प्लांट में पशुओं के गोबर और जैविक कचरे से गैस तैयार की जाती है, जिसका उपयोग रसोई गैस के रूप में किया जाता है। पिछले कई वर्षों से उनका परिवार इसी गैस से खाना बना रहा है। आज जब एलपीजी गैस की कमी के कारण लोग परेशान हैं और महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदने को मजबूर हैं, वहीं निर्मल सिंह को इस समस्या का कोई असर नहीं पड़ा है। उन्हें न तो गैस एजेंसियों के चक्कर लगाने पड़ते हैं और न ही लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ता है।

जानकारी के अनुसार, कुछ लोग वैकल्पिक ईंधन जैसे बायोगैस, केरोसिन आधारित सेटअप, या अन्य गैस जनरेट करने वाले छोटे उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं। इन जुगाड़ सिस्टम में पाइप और छोटे टैंक के जरिए गैस को चूल्हे तक पहुंचाया जा रहा है, जिससे खाना पकाया जा सके। खास बात यह है कि यह तरीका पारंपरिक LPG सिलेंडर पर निर्भरता को कम करता है।

हालांकि, सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के अनौपचारिक और बिना प्रमाणित सेटअप बेहद खतरनाक हो सकते हैं। गैस लीकेज, विस्फोट और आग लगने का खतरा बना रहता है, खासकर तब जब उपकरण मानकों के अनुसार न बने हों। कई मामलों में यह भी देखा गया है कि गलत तरीके से बनाए गए सिस्टम से दुर्घटनाएं हो सकती हैं।

ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे जुगाड़ अस्थायी राहत तो दे सकते हैं, लेकिन दीर्घकालिक समाधान नहीं हैं। सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाएं जैसे उज्ज्वला योजना या सब्सिडी आधारित LPG वितरण प्रणाली ही सुरक्षित और टिकाऊ विकल्प हैं।

इस बीच, प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसे जोखिम भरे प्रयोगों से बचें और केवल प्रमाणित गैस उपकरणों का ही उपयोग करें। साथ ही, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों जैसे बायोगैस प्लांट या इलेक्ट्रिक इंडक्शन कुकर को अपनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि आम लोग परिस्थितियों के अनुसार समाधान ढूंढ लेते हैं, लेकिन सुरक्षा के साथ समझौता करना भारी पड़ सकता है।

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