नई दिल्ली, 06 अप्रैल 2026 । असम के बरपेटा में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगामी चुनावों को लेकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में विकास की गति को बनाए रखने के लिए जनता एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगी दलों के गठबंधन NDA पर भरोसा जताएगी और इस बार जीत की हैट्रिक पूरी करेगी।
भाजपा के स्थापना दिवस के अवसर पर कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ‘नेशन फर्स्ट’ (राष्ट्र प्रथम) के मंत्र के साथ काम करती है। उन्होंने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि “दिल्ली में बैठे शाही परिवार के नामदारों की हार की ‘सेंचूरी’ का रिकॉर्ड इस बार असम के लोग ही बनवाएंगे। कांग्रेस कभी अपना रिपोर्ट कार्ड लेकर जनता के बीच नहीं जाती, जबकि हम साफ नीयत के साथ पाई-पाई का हिसाब देते हैं।”
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले वर्षों में असम ने स्थिर और विकासोन्मुख सरकार का अनुभव किया है, जबकि कांग्रेस के शासनकाल में राज्य कई समस्याओं से जूझता रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की नीतियों ने विकास को धीमा किया, जबकि BJP सरकार ने बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में तेज़ी से काम किया है।
मोदी ने कहा कि असम में सड़कों, रेल नेटवर्क, हवाई संपर्क और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर पूर्वोत्तर क्षेत्र को देश के विकास का नया इंजन बना रहे हैं। उन्होंने स्थानीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण पर भी जोर दिया और कहा कि सरकार ने असम की पहचान को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं।
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने युवाओं, महिलाओं और किसानों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि इन योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचा है और इससे लोगों के जीवन स्तर में सुधार हुआ है।
राजनीतिक रूप से इस बयान को काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि असम में BJP पहले ही लगातार दो बार सरकार बना चुकी है। ऐसे में तीसरी बार सत्ता में वापसी को लेकर पार्टी पूरी ताकत झोंक रही है। मोदी का यह बयान चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य कार्यकर्ताओं में जोश भरना और मतदाताओं को एकजुट करना है।
विश्लेषकों का मानना है कि असम में मुकाबला इस बार भी कड़ा हो सकता है, लेकिन BJP अपने विकास कार्यों और मजबूत संगठन के दम पर बढ़त बनाए रखने की कोशिश में है। आने वाले समय में चुनावी रैलियों और प्रचार अभियान के जरिए सभी पार्टियां अपनी रणनीति को और तेज़ करेंगी।