अमृतसर , 30 मार्च 2026 । पंजाब के Amritsar में नगर निगम हाउस की बैठक उस समय हंगामे की भेंट चढ़ गई, जब करोड़ों रुपये के कथित घोटाले के आरोपों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। बैठक का माहौल इतना तनावपूर्ण हो गया कि कार्यवाही बाधित करनी पड़ी। करीब एक साल बाद बुलाई गई यह अहम बैठक महज कुछ मिनटों में ही खत्म हो गई, जिससे पार्षदों में भारी रोष देखने को मिला। बैठक शुरू होते ही कांग्रेस और भाजपा पार्षदों ने मेयर के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया। पार्षदों का आरोप था कि न तो बजट पर कोई चर्चा की गई और न ही शहर के अहम मुद्दों को उठाया गया। उन्होंने कहा कि यह बैठक केवल औपचारिकता बनकर रह गई, जबकि जनता के जरूरी काम लंबे समय से लंबित पड़े हैं।
जानकारी के मुताबिक, बैठक के दौरान विपक्षी पार्षदों ने नगर निगम के कुछ प्रोजेक्ट्स में बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये के कार्यों में पारदर्शिता नहीं बरती गई और नियमों को दरकिनार कर खर्च किया गया। इन आरोपों के सामने आते ही सदन में तीखी बहस शुरू हो गई।
वहीं, सत्तारूढ़ पक्ष ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया और विपक्ष पर राजनीतिक लाभ लेने के लिए मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने का आरोप लगाया। दोनों पक्षों के बीच नोकझोंक इतनी बढ़ गई कि बैठक में हंगामा खड़ा हो गया और स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई।
स्थिति को संभालने के लिए अधिकारियों को हस्तक्षेप करना पड़ा, लेकिन शोर-शराबे और विरोध के चलते बैठक को स्थगित करना पड़ा। इस घटनाक्रम के बाद शहर की सियासत गरमा गई है और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि यदि घोटाले के आरोपों की जांच होती है, तो कई बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।
फिलहाल, नगर निगम प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है कि वह इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराए और सच्चाई जनता के सामने लाए।