सुप्रीम कोर्ट ने BLO की सुरक्षा को लेकर ECI को जारी किया नोटिस — जमीनी स्तर के चुनाव कर्मियों की सुरक्षा पर गंभीर चिंता

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नई दिल्ली, 09 दिसंबर 2025 । Booth Level Officers (BLOs) भारतीय चुनाव प्रणाली की रीढ़ माने जाते हैं। मतदाता सूची का सत्यापन, घर-घर जाकर जानकारी जुटाना, दावा-आपत्ति प्रक्रिया को संभालना और जमीनी स्तर पर चुनाव की तैयारियों को पारदर्शी रखना — यह सब BLOs ही करते हैं। लेकिन हाल के दिनों में कई राज्यों से उनकी सुरक्षा, उत्पीड़न, धमकियों और अत्यधिक कार्यभार की शिकायतें सामने आई हैं। इसी संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने Election Commission of India (ECI) को कड़ा नोटिस जारी किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल में SIR और BLO के सुसाइड से जुड़े एक मामले पर सुनवाई की। कोर्ट ने इस चुनाव आयोग को नोटिस भेजा है।

याचिका सनातनी संसद संगठन ने दायर की थी। जिसमें SIR प्रक्रिया के बाद पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट पब्लिश होने तक बंगाल पुलिस को चुनाव आयोग के अधीन करने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

कोर्ट में बताया गया कि बंगाल में BLO के खिलाफ हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसलिए वहां सेंट्रल फोर्स तैनात की जाए।

कोर्ट ने ममता सरकार को भी नोटिस जारी किया, जिसमें SIR के पूरा होने तक राज्य में केंद्रीय सशस्त्र बलों की तैनाती के लिए वैकल्पिक निर्देश देने की मांग की गई है।

सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की 2 दलीलें…

  • राज्यों में SIR के काम में रुकावट डालने के दौरान अगर हालात बिगड़ते हैं, तो पुलिस को डेप्युटेशन पर लेने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं होगा।
  • हमारे पास BLO और SIR के काम में लगे दूसरे अधिकारियों को धमकाने से निपटने के लिए सभी संवैधानिक अधिकार हैं।

सुप्रीम कोर्ट के 2 निर्देश…

  • चुनाव आयोग स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के काम में अलग-अलग राज्य सरकारों से सहयोग की कमी को गंभीरता से ले। हालात से निपटें वरना अराजकता फैल जाएगी।
  • BLO के काम में रुकावट हो रही है, लोगों से और राज्यों से सहयोग की कमी है। या फिर उन्हें धमकाने के मामले हैं तो इसे हमारे ध्यान में लाएं। हम आदेश देंगे।

चुनाव आयोग बोला- पुलिस को डेपुटेशन पर लेने के सिवा ऑप्शन नहीं

चुनाव आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने कोर्ट को बताया कि पुलिस राज्य सरकार के हाथों में है। उन्होंने कहा- राज्य सरकार से अपेक्षा की जाती है कि वह हमारा सहयोग करे और हमें सुरक्षा प्रदान करे। अगर राज्य सरकार ऐसा करने से इनकार करती है, तो हमारे पास स्थानीय पुलिस को डेपुटेशन पर लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। अगर हमें पुलिस पर भरोसा नहीं है, तो हमें केंद्रीय बलों को लेना होगा।

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