नई दिल्ली, 18 सितंबर 2026। दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान तैयार की गई ड्राफ्ट मतदाता सूची को लेकर एक और मामला सामने आया है। लाल गुम्बद इलाके में रहने वाले 60 वर्षीय कुन्ने लाल का नाम कथित तौर पर मृत मतदाताओं की सूची में दर्ज हो गया, जबकि उनका कहना है कि वह पूरी तरह जीवित हैं और पिछले चुनावों में मतदान भी करते रहे हैं। मामले की जानकारी सामने आने के बाद परिवार ने मतदाता सूची में हुई इस कथित गलती को लेकर सवाल उठाए हैं।
NGO से मिली जानकारी
कुन्नेलाल की नातिन अनीता ने बताया कि दादाजी ठीक हैं। परिवार में पिता-माता, भाई और उनकी पत्नी और बाकी सभी के नाम ड्राफ्ट लिस्ट में हैं, सिर्फ दादा का नाम नहीं है। दो दिन पहले एनजीओ में काम करने वाली एक महिला ने परिवार को बताया कि उनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है।
नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कुन्ने लाल करीब 50 वर्षों से लाल गुम्बद इलाके में रह रहे हैं। परिवार के अन्य सदस्यों के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में मौजूद हैं, लेकिन कुन्ने लाल का नाम सूची में नहीं मिला। परिवार को बाद में जानकारी मिली कि उनका नाम मृत लोगों की सूची में दर्ज बताया जा रहा है।
कुन्ने लाल ने वीडियो जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वह जीवित हैं। परिवार के मुताबिक, वह सामान्य रूप से रह रहे हैं और पहले भी चुनाव में वोट डालते रहे हैं।
गांव में होने के दौरान नहीं भरा गया एन्युमरेशन फॉर्म
कुन्ने लाल की नातिन अनीता ने बताया कि SIR के दौरान जब एन्युमरेशन फॉर्म भरे जा रहे थे, तब उनके दादा गांव गए हुए थे। परिवार की ओर से अधिकारी को इस बारे में जानकारी दी गई थी।
परिवार का कहना है कि उस समय अधिकारी ने फॉर्म बाद में भरवाने की बात कही थी। हालांकि, उनके मुताबिक बाद में कोई फॉर्म भरने नहीं आया। इसके बाद जब ड्राफ्ट मतदाता सूची सामने आई तो परिवार को कुन्ने लाल का नाम उसमें नहीं मिला और उन्हें कथित तौर पर मृत मतदाताओं की सूची में दर्ज किए जाने की जानकारी हुई।
रिपोर्ट के मुताबिक, परिवार को इस गड़बड़ी की जानकारी एक NGO से जुड़ी महिला के जरिए मिली। महिला ने परिवार को बताया कि कुन्ने लाल का नाम मौजूदा वोटर लिस्ट में नहीं दिखाई दे रहा है।
इसके बाद परिवार ने मतदाता सूची में नाम की स्थिति की जानकारी जुटाई। इसी दौरान कथित तौर पर यह सामने आया कि कुन्ने लाल को मृत बताया गया है। अब परिवार इस रिकॉर्ड को ठीक कराने की प्रक्रिया में जुटा है।
SIR के दौरान पहले भी सामने आईं ऐसी शिकायतें
दिल्ली में SIR के बाद जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची को लेकर इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें जीवित मतदाताओं को मृत, स्थानांतरित या अन्य कारणों से सूची से बाहर किए जाने की शिकायतें की गई हैं। पिछले सप्ताह सामने आई एक रिपोर्ट में भी कुछ मतदाताओं ने दावा किया था कि वर्षों से एक ही इलाके में रहने और मतदान करने के बावजूद उनके नाम सूची में नहीं हैं या उन्हें मृत अथवा स्थानांतरित दिखाया गया है।
हालांकि, प्रत्येक मामले में रिकॉर्ड में गलती कैसे हुई और उसे सुधारने की जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी, यह संबंधित प्रशासनिक जांच और चुनावी प्रक्रिया से स्पष्ट होगा।
47.56 लाख नामों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला
दिल्ली SIR की ड्राफ्ट मतदाता सूची से करीब 47.56 लाख नाम हटाए जाने को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में अदालत 21 सितंबर को सुनवाई करने वाली है। याचिका में करीब 33.12 लाख मतदाताओं को जारी किए गए नोटिस और उन्हें सूची से हटाने के कारणों को सार्वजनिक करने की मांग से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं।
ऐसे में कुन्ने लाल का मामला SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता रिकॉर्ड की शुद्धता और नामों के सत्यापन को लेकर सामने आया एक और उदाहरण है।
अब रिकॉर्ड सुधारने की प्रक्रिया पर नजर
कुन्ने लाल और उनके परिवार के सामने अब सबसे अहम सवाल मतदाता सूची में उनका सही रिकॉर्ड बहाल कराने का है। यदि किसी जीवित मतदाता को गलती से मृत दर्ज किया गया है, तो संबंधित चुनावी अधिकारियों के समक्ष आपत्ति और सुधार की प्रक्रिया के जरिए रिकॉर्ड दुरुस्त कराया जा सकता है।
यह मामला यह भी बताता है कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम, पता और मतदाता की स्थिति की जांच करना कितना महत्वपूर्ण है। अंतिम सूची तैयार होने से पहले सामने आने वाली ऐसी शिकायतों के समाधान पर अब नजर रहेगी।