फूलन देवी को ‘आइकन’ बताकर संजय निषाद का सपा-कांग्रेस पर हमला

बोले- निषाद समाज से किए वादे नहीं निभाए

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गोरखपुर, 18 सितंबर 2026। निषाद पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के मंत्री संजय निषाद ने पूर्व सांसद फूलन देवी का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने फूलन देवी को ‘एक आइकन’ बताते हुए आरोप लगाया कि दोनों दलों ने फूलन देवी और निषाद समाज से किए गए वादों को पूरा नहीं किया। संजय निषाद ने अपने बयान में निषाद समुदाय से राजनीतिक रूप से जागरूक रहने और ऐसे नेताओं से सावधान रहने की अपील की, जो उनके अनुसार केवल चुनाव के समय समाज के बीच सक्रिय होते हैं।

मंत्री संजय निषाद ने कहा कि, ‘मौसमी नेता निषाद का वोट लेकर घड़ियाली आंसू बहाते हैं और सत्ता में जाते हैं। वे सारे लोग निषाद पर हुए अन्यायों को भूल जाते हैं। फिर वे अपने लोगों को सब कुछ दे देते हैं।’ उन्होंने कहा कि,’फूलन देवी एक आइकन थीं जिन्होंने सीधे प्रधानमंत्री से बात की थी। उन्होंने अपनी सुरक्षा की मांग की थी और कहा था कि हम मध्य प्रदेश में असुरक्षित हैं, हम दूसरे प्रदेश में रहेंगे। गारंटी दीजिए, तब तो मैं सरेंडर करूंगी, नहीं तो मैं अपने हथियार से न्याय लूंगी।’

फूलन देवी का सपा से क्यों हुआ था मोहभंग?

निषाद पार्टी के नेता ने कहा कि, ‘ये सारे लोग स्वांग करते हैं कि हमने यह किया, वह किया, लेकिन किया क्या ? फूलन देवी का जब मोहभंग हुआ तो उन्होंने पार्टी (समाजवादी पार्टी) के खिलाफ सेना बनाई, फिर अपनी पार्टी बनाई। पार्टी बनाना अपराध तो नहीं है। वे इसके 27 दिन बाद मारी गईं। यह गलत है। उनका मोहभंग क्यों हुआ, इसका जवाब देना चाहिए था। क्यों दूसरी पार्टी बनाने की जरूरत पड़ी। उन्हें (सपा) बताना चाहिए कि उन्हें मध्य प्रदेश से लाए, तो उन्हें सुरक्षित क्यों नहीं रख पाए। प्रधानमंत्री उस वादे को कैसे भूल गए। उनका अर्जुन सिंह ने सरेंडर कराया था।

सपा और कांग्रेस पर लगाए आरोप

संजय निषाद ने अपने बयान में सपा और कांग्रेस पर निषाद समाज के साथ किए गए वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने विपक्षी दलों की राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि समाज को ऐसे नेताओं से सावधान रहने की जरूरत है, जो उनके अनुसार अलग-अलग समय पर अलग-अलग राजनीतिक पहचान के साथ सामने आते हैं।

हालांकि, ये आरोप संजय निषाद के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं। संबंधित दलों की ओर से इस बयान पर अलग प्रतिक्रिया आने पर राजनीतिक तस्वीर का दूसरा पक्ष भी सामने आएगा।

निषाद समाज की राजनीतिक पहचान का मुद्दा

संजय निषाद ने अपने बयान में मछुआरा और निषाद समुदाय की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि समुदाय अब पहले की तुलना में अधिक जागरूक है और अपने अधिकारों तथा राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर अपनी भूमिका तय कर रहा है।

उन्होंने निषाद पार्टी को इसी राजनीतिक पहचान और अधिकारों से जुड़े मुद्दों के लिए काम करने वाला संगठन बताया। यह उनके राजनीतिक दृष्टिकोण और पार्टी के दावे के रूप में देखा जाना चाहिए।

फूलन देवी का सपा से रहा था राजनीतिक जुड़ाव

फूलन देवी भारतीय राजनीति में भी सक्रिय रही थीं और समाजवादी पार्टी से जुड़ी थीं। उनके राजनीतिक जीवन को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में आज भी अलग-अलग दल अपने-अपने राजनीतिक संदर्भ प्रस्तुत करते हैं। संजय निषाद ने भी अपने हालिया बयान में फूलन देवी के राजनीतिक सफर और निषाद समाज के साथ उनके संबंधों का उल्लेख किया।

फूलन देवी को लेकर संजय निषाद के बयानों का मुद्दा इससे पहले भी उत्तर प्रदेश की राजनीति में विवाद का विषय रहा है। अगस्त 2025 में उत्तर प्रदेश विधानसभा में उनके एक बयान के बाद सपा सदस्यों ने आपत्ति जताई थी और सदन में हंगामा हुआ था।

चुनावी राजनीति में बढ़ी फूलन देवी की चर्चा

फूलन देवी का नाम निषाद और मछुआरा समुदाय से जुड़े राजनीतिक विमर्श में अक्सर सामने आता रहा है। संजय निषाद के ताजा बयान में भी उनकी राजनीतिक विरासत, निषाद समाज की पहचान और विपक्षी दलों के साथ समुदाय के संबंधों को जोड़ा गया है।

इस बयान के जरिए संजय निषाद ने निषाद समाज को राजनीतिक रूप से अधिक सक्रिय और सतर्क रहने का संदेश दिया है। वहीं, सपा और कांग्रेस की ओर से इस पर आने वाली प्रतिक्रिया से इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस आगे बढ़ सकती है।

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