यादव समाज पर टिप्पणी से भड़के तेज प्रताप

मंत्री लखेंद्र पासवान को सुनाया यदुवंश का इतिहास

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पटना, 14 सितंबर 2026। बिहार की सियासत में जातीय टिप्पणी को लेकर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। मंत्री लखेंद्र पासवान की ओर से यादव समाज को लेकर की गई टिप्पणी पर तेज प्रताप यादव ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। तेज प्रताप ने मंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि यादवों का नाम लेते ही किसी को संस्कारहीनता नजर आने लगे तो पहले उसे यदुवंश के इतिहास और योगदान को समझना चाहिए। इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।

तेज प्रताप ने दिखाया मंत्री को आईना

तेज प्रताप यादव ने भगवद गीता को कोट करते हुए कहा है कि श्रीमद्भागवत में कहा गया है- ‘यदोर्वंशं नरः श्रुत्वा सर्वपापैः प्रमुच्यते।’अर्थात् यदुवंश का श्रवण करने मात्र से मनुष्य समस्त पापों से मुक्त हो जाता है। जिस यदुवंश में भगवान श्रीकृष्ण ने अवतार लिया, उस यदुवंश के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करने से पहले लखेंद्र पासवान जी को श्रीमद्भागवत का अध्ययन करना चाहिए, उसकी कथा सुननी चाहिए और यदुवंश के गौरवशाली इतिहास को समझना चाहिए।

मामला उस वक्त गरम हुआ जब मंत्री लखेंद्र पासवान ने यादव समुदाय को लेकर कथित तौर पर ‘संस्कारहीन’ टिप्पणी की। इस बयान पर तेज प्रताप यादव ने नाराजगी जताई और सार्वजनिक रूप से जवाब देते हुए यादव समाज के इतिहास का जिक्र किया।

तेज प्रताप ने कहा कि किसी पूरे समुदाय को लेकर इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है। उनके मुताबिक राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन किसी समाज की पहचान और उसके इतिहास पर टिप्पणी करने से सामाजिक माहौल प्रभावित होता है।

‘यादव का नाम लेते ही संस्कारहीन क्यों?’

तेज प्रताप यादव ने सवाल उठाया कि यादव समाज का नाम आते ही उसे गलत तरीके से पेश करने की कोशिश क्यों की जाती है। उन्होंने यदुवंश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का हवाला देते हुए मंत्री को अपने बयान पर विचार करने की नसीहत दी।

उनकी प्रतिक्रिया को बिहार की जातीय राजनीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राज्य में चुनावी राजनीति के दौरान जातीय पहचान और सामाजिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे अक्सर राजनीतिक बहस के केंद्र में रहते हैं।

तेज प्रताप यादव ने अपने जवाब में यदुवंश की ऐतिहासिक विरासत को सामने रखा। भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में यदुवंश का संबंध भगवान श्रीकृष्ण से जोड़ा जाता है। इसी ऐतिहासिक संदर्भ का उल्लेख करते हुए तेज प्रताप ने यादव समाज के गौरव और योगदान की बात कही।

उनका संदेश साफ था कि किसी भी समाज को केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर परिभाषित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मंत्री की टिप्पणी को लेकर तीखा रुख अपनाते हुए उन्हें इतिहास समझने की सलाह दी।

बिहार की राजनीति में फिर जातीय बयानबाजी

बिहार में जातीय समीकरण चुनावी राजनीति का अहम हिस्सा रहे हैं। यादव समुदाय राज्य की राजनीति में एक प्रभावशाली सामाजिक समूह माना जाता है और लंबे समय से विभिन्न राजनीतिक दलों की रणनीति में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

ऐसे में किसी बड़े नेता या मंत्री की ओर से किसी जातीय समूह पर टिप्पणी होने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज होना स्वाभाविक है। तेज प्रताप के ताजा बयान ने इसी बहस को फिर हवा दे दी है।

बयानबाजी से बढ़ सकती है सियासी गर्मी

तेज प्रताप यादव के पलटवार के बाद अब सबकी नजर मंत्री लखेंद्र पासवान की अगली प्रतिक्रिया पर है। यदि दोनों पक्षों की ओर से बयानबाजी जारी रहती है तो यह मुद्दा बिहार की सियासत में बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है।

फिलहाल तेज प्रताप ने अपने बयान के जरिए यह संकेत दे दिया है कि यादव समाज को लेकर की गई टिप्पणी को वह हल्के में लेने के मूड में नहीं हैं। उन्होंने इतिहास और सामाजिक सम्मान को आधार बनाकर मंत्री को जवाब दिया है।

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