पटना, 14 सितंबर 2026। बिहार की राजनीति में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने मुस्लिम समुदाय की राजनीतिक भागीदारी को लेकर बड़ा बयान दिया है। पटना के सब्जीबाग में आयोजित अल्पसंख्यक सम्मेलन में उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि वे राजनीति में अपने प्रतिनिधित्व की चिंता खुद करें और किसी एक राजनीतिक दल के स्थायी समर्थक या पिछलग्गू बनकर न रहें। उनका कहना था कि समुदाय को अपनी राजनीतिक हिस्सेदारी और नेतृत्व के लिए स्वयं सक्रिय होना चाहिए।
मुसलमानों में पैठ बनाने में जुटे प्रशांत
प्रशांत किशोर ने कहा,’मैं इस अवसर पर हाल के उपचुनाव में आपके समर्थन के लिए आभार व्यक्त करना चाहता हूं। अब हमें अल्पसंख्यकों के लिए एक उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए, जिन्हें लोकतांत्रिक राजनीति में उचित प्रतिनिधित्व मिलना ही चाहिए।’ कहा जा रहा है कि उपचुनाव में शहर की मुस्लिम आबादी ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के बजाय प्रशांत किशोर की पार्टी (जन सुराज) के पक्ष में भारी मतदान किया है। अबतक सभी राजनीतिक दलों में राजद ही मुसलमानों की पहली पसंद हुआ करती थी।
प्रशांत किशोर ने कहा कि किसी भी समुदाय के लिए राजनीति में प्रभावी प्रतिनिधित्व महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक केवल चुनाव के समय किसी पार्टी के पक्ष में मतदान करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि राजनीतिक दलों और सत्ता के स्तर पर अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में भी प्रयास होना चाहिए।
उन्होंने मुस्लिम समुदाय से अपनी राजनीतिक ताकत और नेतृत्व को लेकर अधिक सक्रिय होने का आह्वान किया। उनका संदेश ऐसे समय आया है जब बिहार में विधानसभा राजनीति और आगामी चुनावी समीकरणों को लेकर विभिन्न दलों के बीच जोरदार गतिविधियां चल रही हैं।
‘किसी राजनीतिक दल के पिछलग्गू न बनें’
प्रशांत किशोर ने अपने संबोधन में मुस्लिम मतदाताओं से किसी भी राजनीतिक दल के पिछलग्गू नहीं बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि समुदाय को अपने राजनीतिक हितों और प्रतिनिधित्व के सवाल पर खुद फैसला लेना चाहिए।
उनके इस बयान को बिहार की पारंपरिक वोट बैंक राजनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। खासकर ऐसे समय में जब राष्ट्रीय जनता दल के मुस्लिम मतदाताओं के बीच लंबे समय से मजबूत समर्थन की चर्चा होती रही है, प्रशांत किशोर का यह संदेश राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रशांत किशोर का यह बयान बांकीपुर उपचुनाव में उनकी जीत के बाद आया है। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ बढ़ाने की कोशिशों के बीच यह संदेश दिया। सब्जीबाग भी बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है।
इस बयान से यह संकेत मिलता है कि जन सुराज अब केवल संगठन विस्तार तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
RJD और दूसरे दलों पर भी निशाना
प्रशांत किशोर ने इस दौरान राष्ट्रीय जनता दल और अन्य राजनीतिक दलों पर भी निशाना साधा। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने आरजेडी के टिकट वितरण पर सवाल उठाते हुए पैसों के लेन-देन के आरोप लगाए और उम्मीदवारों के चयन को लेकर भी टिप्पणी की। ये उनके राजनीतिक आरोप हैं, जिन्हें संबंधित दलों के जवाब के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
उन्होंने बीजेपी की राजनीति और जेडीयू की वर्तमान राजनीतिक दिशा पर भी अपनी राय रखी। इससे साफ है कि जन सुराज की रणनीति केवल किसी एक दल के खिलाफ अभियान तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रशांत किशोर बिहार में खुद को एक स्वतंत्र राजनीतिक विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।
मुस्लिम वोट की राजनीति में नई चुनौती
बिहार की चुनावी राजनीति में मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका कई विधानसभा क्षेत्रों में महत्वपूर्ण रहती है। ऐसे में प्रशांत किशोर का सीधे मुस्लिम समुदाय के बीच जाकर राजनीतिक प्रतिनिधित्व की बात करना आने वाले चुनावी समीकरणों के लिए अहम हो सकता है।
यदि जन सुराज मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने में सफल होता है, तो इससे पारंपरिक राजनीतिक दलों के वोट समीकरण प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, बयान को चुनावी प्रभाव में बदलना संगठन की जमीनी ताकत और उम्मीदवारों की स्वीकार्यता पर निर्भर करेगा।
जन सुराज की स्वतंत्र राजनीति पर जोर
प्रशांत किशोर लंबे समय से बिहार में पारंपरिक राजनीतिक व्यवस्था के विकल्प की बात करते रहे हैं। उनका ताजा बयान भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है। वे अलग-अलग सामाजिक समूहों से अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं को लेकर स्वतंत्र रूप से सोचने की अपील कर रहे हैं।
कुल मिलाकर, प्रशांत किशोर का मुस्लिम समुदाय को दिया गया संदेश बिहार की राजनीति में प्रतिनिधित्व और वोट बैंक की बहस को एक बार फिर सामने लाता है। अब देखना होगा कि यह अपील चुनावी राजनीति में कितना असर डालती है और क्या जन सुराज मुस्लिम मतदाताओं के बीच अपने लिए स्थायी राजनीतिक आधार तैयार कर पाता है।