RJD में तेजस्वी का बढ़ा कद, लेकिन MLC चुनाव बना चुनौती

चार साल में टिकट को लेकर तीन बार घमासान

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पटना, 14 सितंबर 2026। बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के भीतर तेजस्वी यादव का कद लगातार बढ़ा है। लालू प्रसाद यादव के बाद पार्टी के प्रमुख फैसलों में तेजस्वी की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। हालांकि, विधान परिषद चुनाव आते ही पार्टी के सामने टिकट बंटवारे और उम्मीदवारों के चयन को लेकर मुश्किलें भी सामने आती रही हैं। ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर MLC चुनाव RJD के लिए इतनी बड़ी चुनौती क्यों बन रहे हैं।

5 भूमिहार और 2 राजपूत को राजद टिकट

2022 के बिहार विधान परिषद चुनाव के दौरान राजद में बड़ी बगावत हुई थी। उस समय स्थानीय प्राधिकार कोटे की 24 सीटों पर चुनाव हो रहा था। राजद ने 23 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। एक सीट CPI के लिए छोड़ी थी। यादव-मुस्लिम समीकरण वाले राजद ने इस चुनाव में अपनी इमेज बदलने की कोशिश की थी। भूमिहार ब्राह्मण जाति के 5, राजपूत जाति के 2 और ब्राह्मण जाति के एक उम्मीदवार, राजद के सिम्बल पर मैदान में उतरे थे।

तेजस्वी यादव के पार्टी में प्रमुख निर्णयकर्ता के तौर पर उभरने के बाद RJD ने संगठन और चुनावी रणनीति में कई बदलाव किए हैं। विधानसभा चुनाव से लेकर विधान परिषद चुनाव तक उम्मीदवारों के चयन में तेजस्वी की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

लेकिन MLC चुनावों में टिकट वितरण कई बार पार्टी के भीतर असंतोष का कारण बना। हालिया चुनाव में भी उम्मीदवारों के सामाजिक समीकरण और राजनीतिक पृष्ठभूमि को लेकर सवाल उठे हैं।

चार साल में सामने आए तीन बड़े विवाद

रिपोर्ट के मुताबिक पिछले करीब चार वर्षों में विधान परिषद चुनाव को लेकर RJD में तीन प्रमुख विवाद सामने आए हैं। इन विवादों में टिकट वितरण, सामाजिक समीकरण और दूसरे दलों से आए नेताओं को उम्मीदवार बनाए जाने जैसे मुद्दे शामिल रहे हैं।

इससे यह संकेत मिलता है कि RJD के सामने चुनौती केवल चुनाव जीतने की नहीं, बल्कि उम्मीदवारों के चयन के बाद पार्टी के भीतर संतुलन बनाए रखने की भी है।

ताजा MLC चुनाव में RJD ने पांच भूमिहार और दो राजपूत उम्मीदवारों को टिकट दिया है। उम्मीदवारों के इस चयन को पार्टी के पारंपरिक सामाजिक समीकरणों से अलग नजरिए से देखा जा रहा है। इसके बाद संगठन के भीतर असंतोष की खबरें भी सामने आईं।

बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे में किसी दल के टिकट वितरण में सामाजिक प्रतिनिधित्व का संतुलन बिगड़ने पर कार्यकर्ताओं और नेताओं की नाराजगी खुलकर सामने आ सकती है।

शिवचंद्र को पार्टी से बाहर करने का विवाद

टिकट बंटवारे को लेकर पार्टी नेतृत्व के फैसलों पर सवाल उठाने वाले नेता शिवचंद्र के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। रिपोर्ट के मुताबिक उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया। इससे यह संदेश गया कि नेतृत्व टिकट वितरण के फैसलों पर सार्वजनिक असहमति को लेकर सख्त रुख अपना रहा है।

हालांकि, पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती यह है कि असहमति को नियंत्रित करने के साथ-साथ पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी संगठन के साथ जोड़े रखा जाए।

दूसरे दलों से आए नेताओं को टिकट का मुद्दा

RJD के सामने एक और विवाद उन नेताओं को टिकट देने को लेकर रहा है, जो हाल में दूसरे राजनीतिक दलों से पार्टी में शामिल हुए थे। पुराने कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर नाराजगी देखी गई कि लंबे समय से संगठन के लिए काम करने वालों की जगह बाहर से आए नेताओं को प्राथमिकता क्यों दी जा रही है।

यही स्थिति किसी भी पार्टी के लिए मुश्किल पैदा कर सकती है। चुनाव में जीत के लिए नए सामाजिक और राजनीतिक समूहों को जोड़ना जरूरी है, लेकिन पुराने कार्यकर्ताओं की राजनीतिक आकांक्षाओं को नजरअंदाज करने से संगठनात्मक असंतोष बढ़ सकता है।

MLC टिकट को लेकर RJD में पहले भी विवाद सामने आते रहे हैं। रिपोर्ट में रोहिणी आचार्य समेत कई नेताओं की ओर से टिकट वितरण और नेतृत्व के फैसलों पर सवाल उठाए जाने का उल्लेख किया गया है। इससे साफ है कि विधान परिषद की सीटों को लेकर पार्टी के भीतर खींचतान कोई नई बात नहीं है।

तेजस्वी के सामने दोहरी चुनौती

तेजस्वी यादव के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ उन्हें MLC चुनाव में पार्टी के उम्मीदवारों को जिताने के लिए मजबूत रणनीति बनानी होगी, वहीं दूसरी तरफ टिकट से नाराज नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी संभालना होगा।

RJD के लिए विधान परिषद चुनाव इसलिए भी अहम हैं क्योंकि इन चुनावों के जरिए पार्टी सदन में अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने की कोशिश करती है। ऐसे में उम्मीदवार चयन का फैसला केवल चुनावी गणित नहीं बल्कि संगठनात्मक संतुलन से भी जुड़ा है।

क्या MLC चुनाव बदलेंगे RJD की रणनीति?

ताजा विवादों से यह सवाल जरूर उठ रहा है कि क्या RJD भविष्य में विधान परिषद चुनाव के लिए उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया में बदलाव करेगी। पार्टी के सामने सामाजिक प्रतिनिधित्व, जीतने की क्षमता, संगठन के प्रति निष्ठा और नए राजनीतिक चेहरों को मौका देने के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।

फिलहाल MLC चुनाव ने तेजस्वी यादव के नेतृत्व और RJD की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। चुनावी नतीजे यह भी बताएंगे कि विवादों के बावजूद पार्टी नेतृत्व का फैसला कितना प्रभावी साबित होता है।

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