NCW वर्कशॉप में हिंदी पर बवाल, केरल की महिला विधायकों ने छोड़ा कार्यक्रम

थरूर बोले- सहकारी संघवाद को समझे दिल्ली

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फरीदाबाद, 10 सितंबर2026 । फरीदाबाद में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की ओर से आयोजित महिला विधायकों की दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला में भाषा को लेकर विवाद खड़ा हो गया। केरल से पहुंची महिला विधायकों ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम के अधिकांश सत्र हिंदी में आयोजित किए जा रहे थे, जिससे गैर-हिंदी भाषी राज्यों से आए प्रतिनिधियों को कार्यवाही समझने में परेशानी हुई। विरोध के बाद केरल का प्रतिनिधिमंडल कार्यक्रम के समापन से पहले ही वॉकआउट कर गया।

हिंदी से नहीं, व्यवस्था से थी आपत्ति

केरल की महिला विधायकों ने साफ किया कि उनका विरोध हिंदी भाषा के खिलाफ नहीं था। उनका कहना था कि राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से प्रतिनिधि शामिल हुए थे, इसलिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए थी जिसमें दक्षिण भारत और अन्य गैर-हिंदी भाषी राज्यों के प्रतिभागी भी आसानी से चर्चा को समझ सकें।

केरल की मंत्री बिंदु कृष्णा के मुताबिक, प्रतिनिधिमंडल ने आयोजकों से अनुरोध किया था कि हिंदी के साथ अंग्रेजी का भी इस्तेमाल किया जाए, लेकिन उनकी मांग पर ध्यान नहीं दिया गया। विधायकों का कहना था कि पोस्टर और अन्य सामग्री अंग्रेजी में थी, लेकिन मुख्य सत्रों में हिंदी का इस्तेमाल ज्यादा हुआ।

विधायी कामकाज की जानकारी लेने पहुंची थीं विधायक

केरल की महिला विधायकों का कहना था कि वे इस कार्यशाला में कानून बनाने, उन्हें लागू करने और सदन की कार्यवाही को प्रभावी तरीके से संचालित करने से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी हासिल करने की उम्मीद लेकर पहुंची थीं।

उनके अनुसार, कार्यक्रम में कई चर्चाएं ऐसी थीं जो विधायकों के लिए अपेक्षित स्तर की नहीं थीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें एक-दूसरे से बातचीत करने और अनुभव साझा करने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला। फातिमा तहलिया ने दावा किया कि एजेंडे में शामिल ओपन-हाउस चर्चा भी उस तरह नहीं हुई, जैसी उम्मीद की गई थी।

केरल के प्रतिनिधिमंडल में डिप्टी स्पीकर शनीमोल उस्मान, मंत्री बिंदु कृष्णा और के.ए. थुलसी के अलावा विधायक के.के. रेमा, फातिमा तहलिया, विद्या बालकृष्णन और उषा विजयन शामिल थीं। यह प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से आयोजित महिला विधायकों की क्षमता निर्माण कार्यशाला में हिस्सा लेने पहुंचा था।

कार्यशाला का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया था। कार्यक्रम का उद्देश्य महिला विधायकों को विधायी कार्य, कानून निर्माण और जनप्रतिनिधि के रूप में उनकी भूमिका से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षण और मार्गदर्शन देना था।

‘हिंदी राष्ट्रीय भाषा है’ वाले दावे पर भी विवाद

केरल की विधायकों ने आरोप लगाया कि विरोध के दौरान एक हिंदी भाषी राज्य की विधायक ने उनसे कहा कि अगर उन्हें हिंदी नहीं आती तो वह उन्हें हिंदी सिखा सकती हैं। इसके बाद कथित तौर पर कुछ प्रतिभागियों ने कहा कि हिंदी राष्ट्रीय भाषा है और चर्चा केवल हिंदी में ही होगी।

हालांकि, केरल की विधायकों ने दोहराया कि उनका मुद्दा हिंदी का विरोध करना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय कार्यक्रम में भाषाई समावेश की व्यवस्था नहीं होना था। उनका तर्क था कि देश के अलग-अलग राज्यों से आने वाले जनप्रतिनिधियों के लिए संवाद का ऐसा माध्यम होना चाहिए जिसे सभी आसानी से समझ सकें।

‘जय श्री राम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे का दावा

केरल के प्रतिनिधिमंडल ने यह भी आरोप लगाया कि विवाद के बीच हॉल में ‘जय श्री राम’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए गए। इसके बाद केरल की महिला विधायक कार्यक्रम के एक सत्र और समापन समारोह से पहले ही बाहर निकल गईं। इन नारों और घटनाक्रम को लेकर NCW की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

इस पूरे घटनाक्रम ने महिला विधायकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम को भाषा और राजनीतिक टकराव की बहस में बदल दिया है। खास तौर पर राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों में क्षेत्रीय भाषाओं और अंग्रेजी के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

शशि थरूर ने किया केरल की विधायकों का समर्थन

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने केरल की महिला विधायकों के वॉकआउट का समर्थन किया। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि यह घटना दिखाती है कि नई दिल्ली ‘सहकारी संघवाद’ को किस तरह गलत तरीके से परिभाषित करती है।

थरूर के बयान के बाद मामला और राजनीतिक हो गया है। एक तरफ इसे भाषा और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व से जुड़ा मुद्दा बताया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे केंद्र और गैर-हिंदी भाषी राज्यों के बीच संवाद के व्यापक सवाल से जोड़कर देखा जा रहा है।

अब NCW के जवाब पर नजर

विवाद के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल राष्ट्रीय महिला आयोग के पक्ष को लेकर है। केरल की विधायकों ने कार्यक्रम की भाषा, विषय-वस्तु और संवाद के तरीके पर कई आपत्तियां दर्ज कराई हैं, जबकि रिपोर्टों के अनुसार उस समय तक NCW की ओर से आरोपों पर तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी गई थी।

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब महिला जनप्रतिनिधियों की राजनीतिक भागीदारी और उन्हें विधायी प्रशिक्षण देने की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाषाई समावेशिता और सभी राज्यों के प्रतिनिधियों को समान रूप से संवाद का अवसर देने का सवाल महत्वपूर्ण बन गया है।

भाषा से आगे बढ़कर संघवाद का सवाल

केरल की महिला विधायकों का कहना है कि मुद्दा किसी एक भाषा को स्वीकार या अस्वीकार करने का नहीं, बल्कि देश की भाषाई विविधता को ध्यान में रखकर राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित करने का है। दूसरी ओर, शशि थरूर के समर्थन ने इस विवाद को सहकारी संघवाद और केंद्र-राज्य संबंधों की बहस से जोड़ दिया है।

अब यह देखना अहम होगा कि NCW इस पूरे घटनाक्रम पर क्या स्पष्टीकरण देता है और भविष्य में राष्ट्रीय स्तर की ऐसी कार्यशालाओं में भाषाई विविधता को ध्यान में रखने के लिए क्या व्यवस्था की जाती है।

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