हरियाणा , 10 सितंबर2026 । हरियाणा के भिवानी-महेंद्रगढ़ से बीजेपी सांसद चौधरी धर्मबीर के बेटे मोहित चौधरी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए Gen-Z आंदोलन को लेकर बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने खुद स्वीकार किया कि वह इस छात्र आंदोलन में शामिल हुए थे। हालांकि, अपनी पहचान सामने आने से बचने के लिए उन्होंने टोपी और मास्क पहन रखा था। मोहित के मुताबिक, उन्हें पता था कि वह एक बीजेपी सांसद के बेटे हैं और अगर प्रदर्शन के दौरान उनकी तस्वीर सार्वजनिक हो जाती तो पूरा मामला राजनीतिक रंग ले सकता था।
मोहित चौधरी ने स्पष्ट तौर पर कहा कि वह खुद दिल्ली के छात्र आंदोलन में गए थे। उनके इस बयान के बाद अब बीजेपी की राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। दरअसल, Gen-Z आंदोलन को लेकर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अर्चना गुप्ता की ओर से प्रदर्शनकारियों पर तीखी टिप्पणियां की गई थीं और कुछ प्रदर्शनकारियों को ‘आतंकवादी’ तक बताया गया था। ऐसे में अब उसी आंदोलन में बीजेपी के मौजूदा सांसद के बेटे के शामिल होने की बात सामने आने से राजनीतिक सवाल खड़े हो गए हैं।
Gen-Z के मुद्दों को समझने की बात
मोहित चौधरी ने प्रदर्शन में शामिल होने की वजह बताते हुए कहा कि अगर युवाओं की कोई समस्या है या कोई चीज देशहित में सही नहीं है, तो युवाओं से मिलकर उनकी बात समझनी चाहिए। उन्होंने पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसी समस्याओं पर युवाओं की चिंता को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि जंतर-मंतर पर मौजूद सभी युवाओं को एक ही नजर से नहीं देखा जा सकता। उनके मुताबिक, वहां बड़ी संख्या में वास्तविक छात्र और युवा मौजूद थे, हालांकि कुछ लोगों का उद्देश्य सरकार को बदनाम करना भी हो सकता है।
आंदोलन को लेकर बीजेपी के भीतर भी उठे थे सवाल
मोहित चौधरी का यह बयान इसलिए राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है क्योंकि Gen-Z आंदोलन को लेकर बीजेपी नेताओं की ओर से अलग-अलग टिप्पणियां सामने आई थीं। हरियाणा बीजेपी अध्यक्ष अर्चना गुप्ता ने आंदोलन को लेकर प्रदर्शनकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे और कुछ प्रदर्शनकारियों को लेकर विवादित टिप्पणी भी की थी। बाद में आंदोलन से जुड़े कुछ दावों की तथ्यात्मकता पर भी सवाल उठे।
ऐसे माहौल में सत्तारूढ़ दल के सांसद के बेटे का खुद उसी प्रदर्शन में शामिल होने की बात स्वीकार करना राजनीतिक बहस को नया मोड़ देता है। हालांकि, मोहित चौधरी ने इसे किसी राजनीतिक दल के समर्थन के तौर पर पेश नहीं किया, बल्कि युवाओं से संवाद और उनकी समस्याओं को समझने की जरूरत पर जोर दिया।
मोहित चौधरी ने जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों को लेकर कहा कि वहां वास्तविक छात्र और युवा भी थे। उन्होंने माना कि कुछ लोगों की राजनीतिक मंशा हो सकती है, लेकिन पूरे आंदोलन को एक ही नजर से देखना सही नहीं होगा।
उनकी यह टिप्पणी उस बहस के बीच आई है जिसमें Gen-Z आंदोलन को लेकर यह सवाल उठता रहा कि यह केवल छात्रों की परीक्षा संबंधी चिंताओं का प्रदर्शन था या इसके पीछे व्यापक राजनीतिक असंतोष भी मौजूद था। मोहित ने अपने बयान से कम से कम इतना जरूर स्पष्ट किया कि उन्होंने वहां मौजूद युवाओं से सीधे तौर पर संवाद करने की कोशिश की थी।
पहचान छिपाने के पीछे क्या थी चिंता?
मोहित चौधरी के अनुसार, उनकी सबसे बड़ी चिंता यह थी कि प्रदर्शन में उनकी मौजूदगी की तस्वीर सामने आने पर उनकी राजनीतिक पहचान को मुद्दा बना दिया जाएगा। बीजेपी सांसद के बेटे होने के कारण मीडिया और राजनीतिक दल स्वाभाविक रूप से उनकी मौजूदगी को अलग नजरिए से देखते।
यही वजह बताई गई कि उन्होंने टोपी और मास्क से चेहरा ढक लिया। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनके साथ कई कैमरे होते और प्रदर्शन के दौरान उनकी तस्वीरें सामने आतीं, तो आंदोलन में युवाओं के मुद्दों के बजाय ‘बीजेपी सांसद का बेटा प्रदर्शन में’ जैसी खबरें ज्यादा चर्चा में रहतीं।
Gen-Z आंदोलन में राजनीतिक परिवारों के युवाओं की मौजूदगी
यह पहली बार नहीं है जब Gen-Z आंदोलन के संदर्भ में राजनीतिक परिवारों से जुड़े युवाओं की भागीदारी चर्चा में आई हो। इससे पहले भी बीजेपी और अन्य राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं के बच्चों की आंदोलन या उससे जुड़े मुद्दों पर सक्रियता सामने आई थी।
ऐसे घटनाक्रमों ने यह सवाल खड़ा किया कि नई पीढ़ी के राजनीतिक विचार हमेशा अपने परिवार या पार्टी की आधिकारिक लाइन के अनुरूप ही हों, यह जरूरी नहीं है। युवाओं के बीच शिक्षा, रोजगार, परीक्षा व्यवस्था और सरकारी नीतियों जैसे मुद्दे अलग तरह की राजनीतिक सोच को जन्म दे रहे हैं।
मोहित चौधरी का खुलासा ऐसे समय सामने आया है जब Gen-Z आंदोलन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस जारी है। उनका यह कहना कि वह खुद आंदोलन में गए थे और पहचान छिपाकर वहां बैठे थे, इस पूरे घटनाक्रम में एक नया राजनीतिक पहलू जोड़ता है।
हालांकि, उनके आंदोलन में शामिल होने को बीजेपी की आधिकारिक स्थिति नहीं माना जा सकता। यह उनका व्यक्तिगत निर्णय और बयान है। लेकिन एक मौजूदा बीजेपी सांसद के बेटे की मौजूदगी यह जरूर दिखाती है कि युवाओं के मुद्दे राजनीतिक दलों और उनके समर्थक परिवारों के भीतर भी चर्चा का विषय बन चुके हैं।
युवाओं के साथ संवाद की बढ़ती जरूरत
Gen-Z आंदोलन ने राजनीतिक दलों के सामने नई पीढ़ी से संवाद की चुनौती भी रखी है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दौर में युवा शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं और सरकारी नीतियों पर तेजी से प्रतिक्रिया देते हैं।
मोहित चौधरी का बयान इसी बदलते राजनीतिक माहौल की ओर इशारा करता है। उन्होंने जिस तरह आंदोलन में शामिल होकर युवाओं से उनकी बात समझने की कोशिश की, उससे यह सवाल भी उठता है कि क्या आने वाले समय में राजनीतिक दल युवाओं के साथ संवाद के नए तरीके अपनाएंगे।
फिलहाल, बीजेपी सांसद के बेटे का यह कबूलनामा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। खास बात यह है कि जिस आंदोलन में उनकी मौजूदगी की जानकारी सामने नहीं आने दी गई, अब उन्होंने खुद सार्वजनिक तौर पर इसका खुलासा कर दिया है।