नई दिल्ली, 03 सितंबर2026 । मातृत्व अवकाश के बाद काम पर लौटी एक चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) को कथित तौर पर उसके पद और योग्यता के अनुरूप जिम्मेदारी देने के बजाय क्लर्क स्तर का काम सौंपने के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कर्मचारी के साथ किए गए इस व्यवहार को गंभीरता से लेते हुए कंपनी को ₹10 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया है। फैसले ने कार्यस्थल पर महिलाओं के सम्मान, समान अवसर और मातृत्व के बाद करियर में भेदभाव के मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है।
31 अगस्त को सुनाए गए फैसले में जस्टिस सचिन दत्ता ने कहा कि मैटरनिटी लीव के बाद काम पर लौटने वाली महिला को उसकी पुरानी पोस्ट या उसके समकक्ष भूमिका मिलनी चाहिए। केवल वेतन और पदनाम बचाए रखना पर्याप्त नहीं है। कोर्ट ने कहा कि समान भूमिका का मतलब समान वेतन, काम का दर्जा, जिम्मेदारियां और सुपरवाइजरी अधिकार भी हैं। कर्मचारी के करियर की संभावनाएं भी सुरक्षित रहनी चाहिए।
मैटरनिटी लीव से लौटीं CA, पुरानी पोस्ट की जगह मिला क्लर्क स्तर का काम
राखी बिष्ट CA हैं। उनके पास करीब 14 साल का पेशेवर अनुभव है। मैटरनिटी लीव से पहले वह ट्रेजरी विभाग में मैनेजर थीं। लीव के दौरान उनकी पुरानी पोस्ट पर दूसरे कर्मचारी को प्रमोट कर दिया गया। बिष्ट के लौटने पर उन्हें कम महत्व वाली जिम्मेदारियां सौंप दी गईं। कोर्ट के अनुसार, उनकी भूमिका व्यावहारिक रूप से क्लर्क स्तर के काम तक सीमित कर दी गई।