SIR के बाद दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में बड़ा बदलाव, 47.5 लाख नाम हटे

वेस्ट दिल्ली से नए मतदाताओं के सबसे ज्यादा आवेदन

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नई दिल्ली, 03 सितंबर2026 । दिल्ली में Special Intensive Revision (SIR) के तहत तैयार की गई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को लेकर सियासी और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। ड्राफ्ट सूची से करीब 47.5 लाख मतदाताओं के नाम बाहर होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, दूसरी ओर नए मतदाताओं को सूची में शामिल कराने के लिए बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें वेस्ट दिल्ली सबसे आगे बताया जा रहा है।

दिल्ली की तुगलकाबाद विधानसभा सीट में सर्वाधिक नाम हटे हैं। यहां 1,92,419 वोटर्स हैं। इनमें 1,00,345 वोटर्स के नाम ड्राफ्ट रोल में हैं, जबकि 92,074 वोटर्स के नाम लिस्ट में नहीं हैं। अगर 2025 विधानसभा चुनाव पर नजर डालें तो 2,04,802 वोटर्स में से 1,14,402 ने मतदान किया था। यहां पिछले साल वोट डालने वालों की संख्या के बराबर लोगों के नाम तक नहीं जुड़े हैं। इसी तरह ओखला में 3,62,813 वोटर्स में से 1,96,362 के नाम लिस्ट में हैं, जबकि 1,64,451 के नाम कट गए हैं। विधानसभा चुनाव में ओखला में 2,08,918 लोगों ने वोट डाला था। यहां भी उतने वोटर ड्राफ्ट रोल में नहीं आए हैं, जितने ने वोट किया था। तीसरे नंबर पर आरके पुरम विधानसभा क्षेत्र है। यहां 1,30,161 वोटर्स में से 57,874 के नाम हटे हैं। आरके पुरम सीट में पिछले विधानसभा चुनाव में 140736 में से 75954 वोटर्स ने वोट डाले थे। वही 72,287 वोटर्स के नाम ड्राफ्ट रोल में हैं, जबकि चुनाव में इससे अधिक ने वोट डाले थे। कस्तूरबा नगर विधानसभा सीट चौथे नंबर पर है। के नाम बचे हैं, जबकि 60,486 के नाम बाहर हुए हैं।

ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति का नाम अंतिम मतदाता सूची से स्थायी रूप से हट गया है। SIR की प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं को अपने नाम से जुड़ी जानकारी की जांच करने और जरूरत पड़ने पर निर्धारित फॉर्म के माध्यम से दावा या आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया जाता है। इसलिए जिन मतदाताओं को ड्राफ्ट सूची में अपना नाम नहीं मिल रहा है, उनके लिए समयसीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी करना महत्वपूर्ण है।

वेस्ट दिल्ली से नए वोटरों के सबसे ज्यादा आवेदन आने की जानकारी इस पूरी कवायद का एक अहम पहलू है। नए मतदाताओं के आवेदन बढ़ने से संकेत मिलता है कि बड़ी संख्या में लोग पहली बार मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया में शामिल हो रहे हैं। इनमें 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके युवा मतदाता प्रमुख रूप से शामिल हो सकते हैं।

SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और पात्र मतदाताओं का रिकॉर्ड व्यवस्थित करना है। इस प्रक्रिया में मृत मतदाताओं, स्थान बदल चुके लोगों, एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों और अन्य रिकॉर्ड से जुड़ी विसंगतियों की पहचान करने का प्रयास किया जाता है। हालांकि, बड़ी संख्या में नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर होने के कारण राजनीतिक दलों और नागरिकों की ओर से इस प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल भी उठ सकते हैं।

मतदाताओं के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम जरूर जांचें। यदि नाम गायब है या मतदाता विवरण में कोई गलती है, तो संबंधित चुनावी प्रक्रिया के तहत दावा या सुधार के लिए आवेदन किया जा सकता है। नए मतदाताओं को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका आवेदन सही तरीके से दर्ज हुआ है और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध हैं।

दिल्ली की विधानसभा और चुनावी राजनीति को देखते हुए वोटर लिस्ट में यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 47.5 लाख नामों के ड्राफ्ट सूची से बाहर होने और नए मतदाताओं के आवेदनों के आंकड़े चुनावी समीकरणों पर चर्चा को भी प्रभावित कर सकते हैं। खासतौर पर उन विधानसभा क्षेत्रों पर नजर रहेगी जहां मतदाता सूची में बड़े स्तर पर बदलाव दर्ज हुआ है।

अब अगला महत्वपूर्ण चरण दावों और आपत्तियों का होगा। इस दौरान मतदाता, राजनीतिक दल और संबंधित पक्ष सूची में शामिल नामों तथा बाहर किए गए नामों की जांच कर सकते हैं। अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि ड्राफ्ट सूची में बदलाव के बाद वास्तविक रूप से कितने नाम शामिल हुए और कितने नाम बाहर रहे।

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