नई दिल्ली, 03 सितंबर2026 । तन्वी की मौत के मामले में अब जांच का दायरा बढ़ता नजर आ रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए AIIMS ने जांच समिति गठित की है। वहीं, तन्वी के पिता FIR दर्ज कराने की तैयारी में जुटे हैं। इस बीच अस्पताल की ओर से तन्वी की मौत की वजह को लेकर अपना पक्ष बताया गया है। घटनाक्रम के बाद मामले में मेडिकल लापरवाही समेत अन्य संभावित पहलुओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
तन्वी के पिता ने आरोप लगाया था कि 2015 में सर्जरी के लिए पैसे और खून जमा होने के बाद भी बार-बार सर्जरी की तारीख बदलती रही। बुधवार को एनबीटी से बात करते हुए तन्वी के पिता ने कहा कि पोस्टमार्टम हो गया है, लेकिन अभी हमने शव नहीं लिया है, हम अपने वकील के जरिए इस मामले को लेकर एफआईआर कराने जा रहे हैं, उसके बाद ही शव लेंगे।
AIIMS की ओर से बनाई गई जांच समिति अब पूरे मामले से जुड़े मेडिकल रिकॉर्ड और उपचार के दौरान सामने आई परिस्थितियों की समीक्षा कर सकती है। समिति का उद्देश्य यह पता लगाना होगा कि तन्वी को इलाज के दौरान किस तरह की चिकित्सा सुविधा मिली और प्रोटोकॉल के मुताबिक उपचार किया गया या नहीं। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
तन्वी के पिता की ओर से FIR की तैयारी किए जाने से मामला अब कानूनी दिशा में भी आगे बढ़ सकता है। परिवार की ओर से यदि पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जाती है तो जांच एजेंसी संबंधित डॉक्टरों, अस्पताल प्रशासन और उपचार से जुड़े अन्य लोगों से पूछताछ कर सकती है। मेडिकल दस्तावेज, जांच रिपोर्ट, दवाओं का रिकॉर्ड और अस्पताल में उपलब्ध अन्य साक्ष्य जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकते हैं।
दूसरी ओर, अस्पताल ने तन्वी की मौत की वजह को लेकर अपना पक्ष रखा है। अस्पताल की ओर से बताई गई वजह और परिवार की ओर से उठाए जा रहे सवालों के बीच अब जांच समिति की रिपोर्ट महत्वपूर्ण हो सकती है। किसी भी तरह की मेडिकल लापरवाही की पुष्टि केवल जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही की जा सकती है।
ऐसे मामलों में अस्पताल और परिजनों के दावों के बीच अंतर होने पर स्वतंत्र जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। मेडिकल विशेषज्ञों की समिति उपचार प्रक्रिया, मरीज की स्थिति, समय पर लिए गए निर्णय और उपलब्ध चिकित्सा रिकॉर्ड का विश्लेषण कर सकती है। इससे यह समझने में मदद मिल सकती है कि मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या उपचार में किसी स्तर पर चूक हुई थी।
FIR दर्ज होने की स्थिति में पुलिस की जांच भी समानांतर रूप से आगे बढ़ सकती है। पुलिस अस्पताल से संबंधित दस्तावेज हासिल करने के साथ डॉक्टरों और स्टाफ के बयान दर्ज कर सकती है। यदि जांच में किसी आपराधिक लापरवाही के संकेत मिलते हैं तो कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल तन्वी मामले में AIIMS की जांच समिति, परिवार की संभावित FIR और अस्पताल के पक्ष—तीनों पर नजर है। जांच रिपोर्ट और पुलिस की कार्रवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि तन्वी की मौत की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और मामले में किसी तरह की लापरवाही या अन्य कानूनी जिम्मेदारी बनती है या नहीं।