नई दिल्ली, 19 अगस्त 2026 । दिल्ली सरकार लोक निर्माण विभाग (PWD) के लिए अपना स्वतंत्र इंजीनियरिंग कैडर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। सरकार ने इसके लिए प्रस्ताव केंद्र के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय को भेज दिया है और अब केंद्र की मंजूरी का इंतजार है। मंजूरी मिलने के बाद दिल्ली PWD में इंजीनियरों की नियुक्ति के लिए अलग भर्ती नियम तैयार किए जाएंगे और परीक्षा के जरिए नई भर्तियों का रास्ता खुलेगा।
सरकार ने केंद्र के आवासन व शहरी कार्य मंत्रालय से मंजूरी मांगी है
PWD मंत्री प्रवेश साहिब सिंह के अनुसार, दिल्ली में रोड, अस्पताल, बिल्डिंग व अन्य तरह के इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने का काम PWD के इंजीनियरों का है, लेकिन विभाग का अपना कोई भी इंजीनियर नहीं है। सभी इंजीनियर केंद्र सरकार के सीपीडब्ल्यूडी से प्रतिनियुक्ति पर आए हैं। यह सीपीडब्ल्यूडी के ऊपर निर्भर करता है कि कब कितने इंजीनियरों को विभाग में प्रतिनियुक्ति पर भेजेगा।
फिलहाल दिल्ली PWD की इंजीनियरिंग व्यवस्था काफी हद तक केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) से प्रतिनियुक्ति पर आने वाले अधिकारियों पर निर्भर है। अधिकारियों की पोस्टिंग और तबादले उनके मूल कैडर के नियमों के तहत होते हैं। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था के कारण कई बार इंजीनियरों के स्थानांतरण से परियोजनाओं की निरंतरता प्रभावित होती है और निर्माण कार्यों की जवाबदेही तय करने में भी मुश्किल आती है।
नए स्वतंत्र कैडर के बनने के बाद दिल्ली सरकार को अपने इंजीनियरों की नियुक्ति और उपलब्धता पर अधिक नियंत्रण मिल सकेगा। शुरुआती स्तर पर जूनियर और असिस्टेंट इंजीनियरों की भर्ती परीक्षा के माध्यम से किए जाने की योजना है। इसके लिए UPSC या किसी अन्य सक्षम पेशेवर संस्था की मदद लेने पर विचार किया जा सकता है।
दिल्ली PWD के पास सड़क, फ्लाईओवर, अस्पताल, सरकारी भवन और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की जिम्मेदारी रहती है। ऐसे में सरकार का तर्क है कि विभाग के पास स्थायी और समर्पित इंजीनियरिंग स्टाफ होने से परियोजनाओं की योजना, निगरानी और क्रियान्वयन में तेजी आ सकती है।
स्वतंत्र कैडर बनने से इंजीनियरों की जवाबदेही भी सीधे दिल्ली सरकार के प्रति तय होने की उम्मीद है। मौजूदा व्यवस्था में प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारियों के कार्यकाल और स्थानांतरण के कारण लंबे समय वाली परियोजनाओं में निरंतरता प्रभावित होने की शिकायतें रही हैं। नया कैडर इस समस्या को दूर करने का प्रयास माना जा रहा है।
हालांकि, अभी इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने के लिए केंद्र की मंजूरी जरूरी है। मंजूरी मिलने के बाद भर्ती नियम, कैडर की संरचना और मौजूदा CPWD अधिकारियों के समायोजन जैसे मुद्दों पर विस्तृत प्रक्रिया तय होगी। इसके बाद ही दिल्ली PWD को पूरी तरह स्वतंत्र इंजीनियरिंग व्यवस्था मिलने की दिशा में अगला कदम उठाया जा सकेगा।