तेल अवीव, 03 अक्टूबर 2026 । फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में चार पायलट सवार थे। इनमें से दो पायलट उस समय विमान के कॉकपिट में ड्यूटी पर थे, जबकि दो अन्य पायलट यात्रियों के बीच बैठे थे। उनका विमान उड़ाने वाली टीम का हिस्सा होना जरूरी नहीं था, बल्कि वे एयरलाइन की क्रू-पोजिशनिंग व्यवस्था के तहत यात्रा कर रहे थे।
हमले के बाद कैप्टन ने जैसे-तैसे कॉकपिट का दरवाजा खोला। इसके बाद विमान में बैठे 2 अन्य पायलट कॉकपिट में पहुंचे और विमान की कमान संभाली। उन्होंने बोइंग 737 मैक्स 8 को सुरक्षित सऊदी अरब में उतारा।
एविएशन सिक्योरिटी एक्सपर्ट के मुताबिक, अगर विमान को संभालने में करीब 5 सेकेंड और लग जाते तो वह ऐसी स्थिति में पहुंच सकता था, जहां उसे दोबारा ऊपर लाना और क्रैश होने से बचाना संभव नहीं होता।
रिपोर्टों के मुताबिक, इस रूट पर क्षेत्रीय परिस्थितियों के कारण विमान को अचानक दूसरे या लंबे रूट से उड़ाना पड़ सकता था। ऐसी स्थिति में उड़ान का समय बढ़ सकता था और मूल क्रू के निर्धारित ड्यूटी-आवर प्रभावित हो सकते थे।
इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए दो अतिरिक्त पायलटों को भी फ्लाइट में रखा गया था। रिपोर्ट में इसे सुरक्षा संबंधी किसी पहले से मिले अलर्ट से जोड़कर नहीं देखा गया है।
क्या होता है ‘डेडहेडिंग’?
एविएशन में Deadheading एक सामान्य प्रक्रिया है। इसमें एयरलाइन के पायलट या क्रू सदस्य किसी दूसरी फ्लाइट में यात्री के तौर पर सफर करते हैं, ताकि उन्हें नेटवर्क के किसी दूसरे शहर में पहुंचाया जा सके और वहां से वे अपनी अगली निर्धारित ड्यूटी संभाल सकें।
यानी विमान में बैठे ये पायलट उस समय फ्लाइट के ऑपरेटिंग क्रू नहीं थे, लेकिन वे एयरलाइन के ड्यूटी सिस्टम का हिस्सा थे।
अचानक अतिरिक्त पायलटों की भूमिका बेहद अहम हो गई
30 सितंबर 2026 को FZ1073 में कॉकपिट के अंदर गंभीर घटना हुई। रिपोर्टों के अनुसार, कैप्टन पर सह-पायलट ने हमला किया और विमान तेजी से नीचे जाने लगा। कैप्टन ने घायल होने के बावजूद कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की, जिसके बाद यात्रियों ने अंदर पहुंचकर स्थिति को संभालने में मदद की।
इसके बाद यात्री केबिन में मौजूद दो अतिरिक्त फ्लाईदुबई पायलट कॉकपिट तक पहुंचे और विमान को नियंत्रित करने में मदद की। अंततः विमान को सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया।
सामान्य क्रू व्यवस्था कैसे अलग थी?
आमतौर पर किसी वाणिज्यिक यात्री विमान में दो पायलट कॉकपिट में होते हैं। हालांकि, उड़ान की लंबाई, संभावित रूट बदलाव, क्रू-ड्यूटी नियम और परिचालन परिस्थितियों के आधार पर अतिरिक्त पायलटों की जरूरत पड़ सकती है।
इस मामले में चारों पायलटों का एक साथ विमान में होना इसी तरह की परिचालन और क्रू-पोजिशनिंग व्यवस्था से जुड़ा बताया गया है।
जिस व्यवस्था का पता नहीं चलता, वही संकट में काम आई
चार पायलटों की मौजूदगी शुरू में यात्रियों के लिए सामान्य बात नहीं थी, क्योंकि दो अतिरिक्त पायलट यात्री सीटों पर बैठे थे। लेकिन घटना के दौरान यही व्यवस्था महत्वपूर्ण साबित हुई। यात्रियों और अतिरिक्त पायलटों की मदद से विमान को नियंत्रण में लाया गया और उसे निर्धारित गंतव्य के बजाय आपात स्थिति में तबुक डायवर्ट किया गया।
फ्लाईदुबई ने भी कहा है कि विमान में मौजूद उसके क्रू ने विमान को सुरक्षित किया, डायवर्ट किया और सुरक्षित लैंडिंग कराई। घटना की परिस्थितियों की जांच अभी जारी है।