AAP विधायक कुलदीप कुमार को तड़के घर से हिरासत में लिया, 14 घंटे बाद रिहा; हाईकोर्ट पहुंचा मामला

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नई दिल्ली, 19 अगस्त 2026 । आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक कुलदीप कुमार को मंगलवार तड़के उनके घर से पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद करीब 14 घंटे बाद रिहा कर दिया गया। मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा, जहां विधायक की कथित हिरासत को लेकर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की गई थी। पुलिस की ओर से रिहाई की जानकारी दिए जाने के बाद अदालत ने याचिका को बंद कर दिया।

  • कुलदीप कुमार की ओर से सीनियर एडवोकेट शादान फरासत ने चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय के समक्ष मामले का तत्काल जिक्र किया।
  • उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक को बिना उचित प्रक्रिया के एहतियाती हिरासत में लिया गया।
  • याचिका में पुलिस पर घर में सुबह-सुबह कार्रवाई के दौरान संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का भी आरोप लगाया गया।
  • याचिका में कहा गया कि कुलदीप कुमार एक स्थानीय सफाई कर्मचारी की हत्या के मामले में न्याय और पीड़ित परिवार को मुआवजे की मांग को लेकर चल रहे विरोध-प्रदर्शन में शामिल थे।

याचिका में आरोप लगाया गया कि सुबह करीब चार बजे बड़ी संख्या में सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी कुलदीप कुमार के घर पहुंचे और उन्हें अपने साथ ले गए। परिवार की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि घर के CCTV कैमरे तोड़े गए और DVR भी ले जाया गया। इन आरोपों पर परिवार को आगे उचित कानूनी कार्रवाई करने की छूट दी गई है।

कुलदीप कुमार अपने इलाके के एक सफाई कर्मचारी की मौत के बाद उसके परिवार को मुआवजा और न्याय दिलाने की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन में शामिल थे। AAP नेताओं ने उनकी हिरासत को लेकर दिल्ली पुलिस और सरकार पर सवाल उठाए। पार्टी नेताओं ने इसे राजनीतिक कार्रवाई बताते हुए विरोध दर्ज कराया।

मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस ने अदालत को बताया कि विधायक को दोपहर करीब 3:48 बजे रिहा कर दिया गया था। इसके बाद जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर डुडेजा की पीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को बंद कर दिया। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि विधायक का परिवार कथित हिरासत और संपत्ति को हुए नुकसान को लेकर कानून के तहत उचित उपाय अपना सकता है।

रिहाई के बाद कुलदीप कुमार ने दावा किया कि उन्हें करीब 14-15 घंटे तक बाहर रखा गया और इस दौरान उनके घर पर कार्रवाई की गई। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारी के परिवार के लिए न्याय और दलितों के सम्मान की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।इस घटनाक्रम पर बीजेपी ने भी AAP पर पलटवार किया। बीजेपी की ओर से कहा गया कि पुलिस ने पूछताछ के बाद विधायक को रिहा कर दिया, लेकिन AAP नेताओं ने पूरे दिन ऐसा माहौल बनाया जैसे विधायक लापता हों। इस तरह हिरासत का मामला अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ-साथ कानूनी मुद्दा भी बन गया है।

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