पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व पर सियासत तेज, राजा वडिंग बोले— अध्यक्ष पद से इस्तीफा नहीं दूंगा

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चंडीगढ़, 04 अगस्त 2026 । पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजा वडिंग ने अपने पद से इस्तीफा देने की अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि वह प्रदेश अध्यक्ष के पद पर बने रहेंगे। उन्होंने सार्वजनिक तौर पर कहा कि उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है और न ही ऐसा कोई फैसला लिया है। उनके इस बयान को पंजाब कांग्रेस में चल रही नेतृत्व संबंधी चर्चाओं के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही, उनके बयान को पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी की हालिया टिप्पणियों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

संगठन को मजबूत करने के लिए काम करते रहेंगे

इसी बीच, पंजाब कांग्रेस प्रमुख ने कहा कि अगर पार्टी नेतृत्व उन्हें हटाने का फैसला करता है तो भी वह संगठन को मजबूत करने के लिए काम करते रहेंगे। वडिंग ने कहा कि पिछले चार वर्षों से उन्होंने पार्टी के लिए पूरी निष्ठा से काम किया है और 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 13 में से सात सीटें जीती थीं। पार्टी के ‘हर बूथ कांग्रेस मजबूत’ कार्यक्रमों के दौरान वडिंग और बघेल ने बठिंडा और मुक्तसर में मीडिया से बातचीत की।

राजा वडिंग ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी है, उसका वह पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन कर रहे हैं और संगठन को मजबूत बनाने के लिए लगातार काम करेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर फैसले व्यक्तिगत बयानों से नहीं, बल्कि कांग्रेस नेतृत्व के निर्देशों के अनुसार लिए जाते हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से भी अफवाहों पर ध्यान न देने और संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया।

पंजाब कांग्रेस में पिछले कुछ समय से संगठनात्मक बदलाव और नेतृत्व को लेकर लगातार चर्चाएं होती रही हैं। इसी बीच चरणजीत सिंह चन्नी के कुछ बयानों के बाद राजनीतिक हलकों में प्रदेश अध्यक्ष के भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं। हालांकि, राजा वडिंग के स्पष्ट बयान के बाद इन चर्चाओं पर फिलहाल विराम लगने की संभावना जताई जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब में आगामी राजनीतिक चुनौतियों और चुनावी तैयारियों को देखते हुए कांग्रेस संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की कोशिश कर रही है। ऐसे समय में प्रदेश अध्यक्ष का यह बयान पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए एक स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि फिलहाल नेतृत्व में किसी बदलाव का संकेत नहीं है। अब निगाहें कांग्रेस हाईकमान के आगामी फैसलों और पंजाब इकाई की संगठनात्मक गतिविधियों पर रहेंगी।

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