नई दिल्ली/पटना, 30 जुलाई 2026 । बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश की नियुक्ति को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से महत्वपूर्ण सवाल पूछा है। अदालत ने कहा कि “दीपक प्रकाश न विधायक हैं और न ही विधान परिषद (MLC) के सदस्य, फिर वे मंत्री कैसे बने हुए हैं?” इस टिप्पणी के साथ सर्वोच्च अदालत ने बिहार सरकार से इस संबंध में विस्तृत जवाब मांगा है।
‘न MLA न MLC फिर भी मंत्री बने हुए हैं’
याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि छह महीने से ज्यादा समय बीत चुका है। दीपक प्रकाश न विधायक हैं और न ही एमएलसी, इसके बावजूद वह मंत्री पद पर बने हुए हैं। वकील ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में दखल लेने की अपील करते हुए कहा, ‘माई लॉर्ड, अब छह महीने से ज़्यादा हो गए हैं। वह मंत्री बने हुए हैं।’
जनहित याचिका पर सरकार को जारी हुआ था नोटिस
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता और व्हिसलब्लोअर राकेश कुमार सिंह की ओर से दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर बिहार सरकार को नोटिस जारी किया था। याचिका में बिहार में नई सम्राट सरकार बनने के बाद दीपक प्रकाश की मंत्री के तौर पर दोबारा नियुक्ति को चुनौती दी गई थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने संविधान के उन प्रावधानों पर भी ध्यान दिलाया, जिनके तहत किसी गैर-विधायक को मंत्री नियुक्त किया जा सकता है, लेकिन उसे निर्धारित समय-सीमा के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना आवश्यक होता है। अदालत अब यह जानना चाहती है कि दीपक प्रकाश की नियुक्ति और उनके मंत्री पद पर बने रहने का संवैधानिक आधार क्या है और राज्य सरकार इस मामले में किस कानूनी प्रावधान का पालन कर रही है।
याचिकाकर्ता की ओर से मंत्री पद पर बने रहने की वैधता पर सवाल उठाए गए, जबकि बिहार सरकार की ओर से अदालत में अपना पक्ष रखा गया। मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अब अगली सुनवाई में सरकार के जवाब और संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर मामले पर आगे विचार किया जाएगा।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह मंत्री नियुक्ति से जुड़े संवैधानिक प्रावधानों और जनप्रतिनिधित्व की व्यवस्था से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले का असर भविष्य में गैर-विधायकों की मंत्री नियुक्ति से जुड़े मामलों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल अदालत ने कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है और मामले की सुनवाई जारी है।