राम मंदिर ट्रस्ट के CEO चयन पर उठे सवाल, पूर्व IPS ने इंटरव्यू प्रक्रिया पर मांगा जवाब
अयोध्या , 14 सितंबर 2026। अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले CEO के रूप में रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति के बाद अब चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पूर्व IPS अधिकारी राजेश पांडेय ने दावा किया है कि CEO पद के लिए चयनित उम्मीदवारों के इंटरव्यू में जितेंद्र मिश्रा शामिल नहीं हुए थे, इसके बावजूद उन्हें इस पद की जिम्मेदारी कैसे मिली, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।
अपनी चिट्ठी में अमिताभ ठाकुर ने कहा कि राजेश पांडे ने हाल ही में एक न्यूज चैनल के साथ पॉडकास्ट में दावा किया कि सीईओ के पद पर चुने गए रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का नाम उन 16 उम्मीदवारों में नहीं था, जिन्हें इंटरव्यू के लिए चुना गया था। साथ ही उन्होंने कहा कि जितेंद्र मिश्रा ने इंटरव्यू प्रक्रिया में भाग ही नहीं लिया था, इसके बावजूद उनकी नियुक्ति सीईओ के पद पर कर दी गई। राजेश पांडे ने कहा कि सीईओ के लिए उनका चुना जाना लगभग तय था, लेकिन आखिर में सब बदल गया।
पूर्व IPS राजेश पांडेय ने उठाया सवाल
पूर्व IPS राजेश पांडेय के मुताबिक राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए बड़ी संख्या में आवेदन आए थे और लंबी चयन प्रक्रिया के बाद उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट किया गया। उनका कहना है कि अंतिम चरण में जिन 16 उम्मीदवारों का आमने-सामने इंटरव्यू हुआ, उनमें जितेंद्र मिश्रा शामिल नहीं थे।
राजेश पांडेय ने इस मामले में ट्रस्ट से सवाल करते हुए कहा कि अगर इंटरव्यू में शामिल नहीं हुए उम्मीदवार का चयन किया गया तो इसकी प्रक्रिया क्या रही? उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें स्वयं उम्मीद थी कि CEO पद के लिए उनका चयन हो सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय में जितेंद्र मिश्रा के नाम पर मुहर लगी।
राम मंदिर ट्रस्ट के CEO पद के लिए देशभर से कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे। ट्रस्ट ने इसके लिए एक सर्च कमेटी गठित की थी, जिसने उम्मीदवारों के आवेदन और योग्यता के आधार पर कई स्तरों पर स्क्रीनिंग की।
रिपोर्ट के मुताबिक पहले चरण में उम्मीदवारों का मूल्यांकन निर्धारित अंकों के आधार पर किया गया। इसके बाद चयन प्रक्रिया आगे बढ़ी और ऑनलाइन इंटरव्यू के बाद उम्मीदवारों को आमने-सामने बातचीत के लिए बुलाया गया।
ट्रस्ट की ओर से बताया गया था कि प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष रखने का प्रयास किया गया। सर्च कमेटी ने अंतिम रूप से तीन नामों का पैनल तैयार करके ट्रस्ट के सामने रखा था।
16 उम्मीदवारों का हुआ था फेस-टू-फेस इंटरव्यू
चयन प्रक्रिया के दौरान 17 उम्मीदवारों को आमने-सामने इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था, जिनमें से 16 उम्मीदवारों ने साक्षात्कार में हिस्सा लिया। इसके बाद अंतिम पैनल तैयार किया गया।
यही वह चरण है जिसे लेकर पूर्व IPS अधिकारी ने सवाल उठाया है। उनका दावा है कि जितेंद्र मिश्रा इस इंटरव्यू प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए थे। ऐसे में उनके चयन का आधार क्या रहा, इस पर ट्रस्ट की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने आने की जरूरत है।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार ट्रस्ट ने सर्च कमेटी के माध्यम से तीन नामों का पैनल तैयार कराया था और अंतिम निर्णय ट्रस्ट ने पैनल में से एक नाम पर लिया। इसलिए केवल इंटरव्यू में शामिल होने या न होने के आधार पर नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया को समझना जरूरी है।
आखिर जितेंद्र मिश्रा को क्यों मिली जिम्मेदारी?
रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा का भारतीय वायुसेना में लंबा और महत्वपूर्ण करियर रहा है। वह वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने कई संवेदनशील सैन्य और प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाली हैं।
उनका नाम कारगिल युद्ध के दौरान ऑपरेशन सफेद सागर से भी जुड़ा रहा है। इसके अलावा 2025 के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी वह वेस्टर्न एयर कमांड की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। ऐसे में ट्रस्ट के लिए उनका प्रशासनिक अनुभव और नेतृत्व क्षमता महत्वपूर्ण कारक रहे होंगे।
राम मंदिर ट्रस्ट ने क्या कहा था?
CEO चयन के लिए गठित सर्च कमेटी के अध्यक्ष रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली ने चयन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष रखने की बात कही थी। ट्रस्ट को तीन नामों का पैनल सौंपे जाने के बाद बैठक में जितेंद्र मिश्रा के नाम को मंजूरी दी गई।
इसलिए अब पूर्व IPS राजेश पांडेय के सवालों के बीच सबसे अहम मुद्दा यही है कि अंतिम पैनल कैसे तैयार हुआ और उसमें जितेंद्र मिश्रा का नाम किस चरण में शामिल हुआ।
CEO पद की जिम्मेदारी कितनी अहम?
राम मंदिर में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए CEO का पद बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। CEO के सामने मंदिर के दैनिक प्रशासन, वित्तीय व्यवस्था, कर्मचारियों के प्रबंधन, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय जैसी बड़ी जिम्मेदारियां होंगी।
ट्रस्ट ने पहली बार इस स्तर का पूर्णकालिक प्रशासनिक पद बनाया है। ऐसे में जितेंद्र मिश्रा के सामने मंदिर की विशाल व्यवस्थाओं को पेशेवर तरीके से संचालित करने की चुनौती होगी।
जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को लेकर उठे सवालों का अंतिम जवाब ट्रस्ट की चयन प्रक्रिया के विस्तृत विवरण से ही मिल सकता है। फिलहाल पूर्व IPS अधिकारी ने चयन प्रक्रिया के एक महत्वपूर्ण चरण पर सवाल उठाया है, जबकि ट्रस्ट की ओर से चयन को सर्च कमेटी और तीन नामों के पैनल की प्रक्रिया से जोड़कर बताया गया है।
ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि राम मंदिर ट्रस्ट इस सवाल पर कोई विस्तृत स्पष्टीकरण देता है या नहीं।