चंडीगढ़, 24 जुलाई 2026 । केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को पत्र लिखकर राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान देने की अपील की है। पत्र के माध्यम से उन्होंने पंजाब सरकार से जनहित और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े मामलों में आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है।
बिट्टू ने किया यह दावा
उन्होंने दावा किया कि पंजाब में रेलवे अवसंरचना को काफी मजबूत करने की भारत सरकार की प्रतिबद्धता के बावजूद, जमीन अधिग्रहण, राज्य सरकार के स्तर पर कानूनी मंजूरी और प्रशासनिक मंजूरी में देरी की वजह से कई परियोजनाएं अटकी हुई हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे ही परियोजनाओं में फिरोजपुर-पट्टी नई रेल लाइन परियोजना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि 25.72 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन के लिए फिरोज़पुर और तरनतारन जिलों में 165.69 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण की जरूरत है।
पत्र में लिखी ये बातें
- पत्र के अनुसार रेल मंत्रालय ने दिसंबर 2025 में पंजाब सरकार के पास ज़मीन अधिग्रहण की पूरी रकम 194.11 करोड़ रुपये जमा कर दी थी, लेकिन अधिगृहीत जमीन का कब्जा अभी तक नहीं सौंपा गया है, जिससे निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पा रहा है।
- बिट्टू ने 18.11 किलोमीटर लंबी राजपुरा-मोहाली नई रेल लाइन परियोजना के बारे में कहा कि पटियाला, फतेहगढ़ साहिब और साहिबज़ादा अजीत सिंह नगर ज़िलों में जमीन अधिग्रहण का काम अब भी अटका हुआ है, जिससे परियोजना में देरी हो रही है।
रवनीत सिंह बिट्टू ने अपने पत्र में कहा कि पंजाब के विकास, लोगों की समस्याओं के समाधान और राज्य के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की कि सरकार ऐसे विषयों पर गंभीरता से विचार करे, जिनका सीधा असर आम जनता और राज्य के भविष्य पर पड़ता है।
केंद्रीय मंत्री ने पत्र के जरिए पंजाब सरकार के सामने अपनी चिंताएं और सुझाव रखे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर तालमेल से ही पंजाब में विकास कार्यों को गति दी जा सकती है। राज्य के हित में सभी पक्षों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है।
इस पत्र के बाद पंजाब की राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्ष और सत्ताधारी दल के नेता इस मुद्दे पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे सकते हैं। वहीं, अब मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब सरकार की ओर से इस पत्र पर क्या जवाब आता है, इस पर भी नजर रहेगी।
रवनीत सिंह बिट्टू पहले भी पंजाब से जुड़े कई मुद्दों को लेकर अपनी राय रखते रहे हैं। उनका यह पत्र केंद्र और राज्य सरकार के बीच संवाद और राजनीतिक बहस को एक बार फिर सामने लाता है।