सत्य निकेतन हादसे के बाद गाजियाबाद में खुली जर्जर इमारतों की पोल
तुलसी निकेतन के 2292 फ्लैट खतरे में; वैशाली के टावर भी असुरक्षित
गाजियाबाद, 08 सितंबर2026 । दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए दर्दनाक हादसे के बाद अब गाजियाबाद में भी जर्जर और खतरनाक इमारतों को लेकर चिंता बढ़ गई है। जिले में कई ऐसी पुरानी इमारतें सामने आई हैं, जिनमें लोग अभी भी जान जोखिम में डालकर रह रहे हैं। सबसे गंभीर स्थिति तुलसी निकेतन की बताई जा रही है, जहां कुल 2,292 फ्लैट लंबे समय से जर्जर हैं। इन भवनों को पहले ही रहने के लिए असुरक्षित माना जा चुका है, लेकिन पुनर्विकास की प्रक्रिया पूरी होने तक बड़ी संख्या में परिवार वहीं रह रहे हैं।
तुलसी निकेतन में 2292 फ्लैटों का मामला गंभीर
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने करीब 35 वर्ष पहले तुलसी निकेतन योजना विकसित की थी। 7.83 हेक्टेयर में विकसित इस योजना में 2,004 ईडब्ल्यूएस और 288 एलआईजी फ्लैट बनाए गए थे। यहां करीब 60 दुकानें भी हैं और मौजूदा समय में 20 हजार से ज्यादा लोगों के रहने की बात सामने आई है। लगातार खराब होती संरचनात्मक स्थिति और पहले हो चुके हादसों के कारण इन भवनों को जर्जर घोषित किया गया था।
तुलसी निकेतन के पुनर्विकास की योजना पर लंबे समय से काम चल रहा है। मौजूदा जर्जर फ्लैटों को हटाकर नए बहुमंजिला भवन बनाए जाने की योजना है। हालांकि, बड़ी चुनौती यह है कि वहां रहने वाले लोग वैकल्पिक आवास मिलने से पहले अपने घर खाली करने को तैयार नहीं हैं। ऐसे में एक तरफ लोगों की सुरक्षा का सवाल है तो दूसरी तरफ उनके पुनर्वास और संपत्ति अधिकारों का मुद्दा भी जुड़ा हुआ है।
पहले भी हो चुका है बड़ा हादसा
तुलसी निकेतन की जर्जर इमारतों की स्थिति केवल कागजों तक सीमित नहीं है। मई 2025 में यहां एक जर्जर फ्लैट का छज्जा गिरने से दो लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना ने इलाके में रहने वाले लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी थी। इसके बावजूद जर्जर भवनों में रहने वाले परिवारों के सामने तत्काल सुरक्षित आवास की व्यवस्था सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है।
वैशाली के टावर भी खतरे की जद में
गाजियाबाद के वैशाली सेक्टर-4 में भी कई बहुमंजिला इमारतों में संरचनात्मक समस्याएं सामने आई हैं। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, वहां दो टावरों को जर्जर घोषित किया गया है। इन भवनों के बेसमेंट में कोचिंग सेंटर और शोरूम जैसी व्यावसायिक गतिविधियां चलने की भी जानकारी सामने आई है, जिससे सुरक्षा को लेकर सवाल और गंभीर हो जाते हैं। प्रशासन अब ऐसे भवनों को चिन्हित करने और उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा है।
जिले में सैकड़ों असुरक्षित भवनों की चुनौती
गाजियाबाद में समस्या सिर्फ तुलसी निकेतन और वैशाली तक सीमित नहीं है। एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में 150 से अधिक भवनों को असुरक्षित या खतरनाक श्रेणी में रखा गया है, जबकि दूसरी रिपोर्ट में साढ़े तीन हजार से ज्यादा जर्जर भवनों में लोगों के रहने की बात सामने आई है। इससे साफ है कि पुराने और कमजोर भवनों की पहचान, संरचनात्मक ऑडिट, खाली कराने और पुनर्विकास की प्रक्रिया को लेकर व्यापक कार्रवाई की जरूरत है।
सत्य निकेतन हादसे के बाद जर्जर इमारतों को लेकर पूरे दिल्ली-एनसीआर में सवाल उठ रहे हैं। गाजियाबाद में भी अब यह चुनौती सिर्फ भवनों को गिराने तक सीमित नहीं है। प्रशासन के सामने यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है कि असुरक्षित भवनों में रहने वाले परिवारों को समय रहते सुरक्षित स्थान मिले और पुनर्विकास की योजनाएं जमीन पर तेजी से लागू हों। तुलसी निकेतन के 2,292 फ्लैट और वैशाली के जर्जर टावर इस पूरे संकट की गंभीरता को सामने रखते हैं।