लुधियाना, 09 जुलाई 2026 । पंजाब के लुधियाना सिविल अस्पताल में फोरेंसिक विभाग लंबे समय से स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। जानकारी के अनुसार, फोरेंसिक एक्सपर्ट के दोनों स्वीकृत पद पिछले एक वर्ष से खाली हैं, जिससे पोस्टमार्टम, मेडिको-लीगल मामलों और अन्य फोरेंसिक जांच संबंधी कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
एक्सपर्ट्स की कमी का रोना: प्राइवेट अस्पतालों के आगे हाथ फैलाने को मजबूर सरकारी तंत्र
आंकड़ों पर नजर डालें तो लुधियाना के नामी प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के पास फोरेंसिक एक्सपर्ट्स की कोई कमी नहीं है, लेकिन सरकारी अस्पताल पूरी तरह कंगाल हो चुके हैं। इस समय DMCH (डी.एम.सी.एच.): के पास 4 फोरेंसिक एक्सपर्ट मौजूद हैं, CMCH (सी.एम.सी.एच.): के पास 3 विशेषज्ञ अपनी सेवाएं दे रहे हैं, ESIC मॉडल अस्पताल: के पास भी 1 एक्सपर्ट तैनात है। इसके विपरीत, जहां रोज़ाना दर्जनों की संख्या में पुलिस केस और शव पोस्टमार्टम के लिए आते हैं। जिला सिविल अस्पताल फिलहाल दूसरे डॉक्टरों और बाहरी संस्थानों के आगे हाथ फैलाकर जैसे-तैसे काम चलाया जा रहा है।
विशेषज्ञों की अनुपलब्धता के कारण कई मामलों में अतिरिक्त कार्यभार अन्य चिकित्सकों पर पड़ रहा है। इससे जांच प्रक्रिया में देरी होने की आशंका बढ़ गई है और न्यायिक मामलों में समय पर मेडिकल रिपोर्ट उपलब्ध कराने में भी चुनौतियां सामने आ रही हैं।
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े जानकारों का कहना है कि फोरेंसिक विशेषज्ञ गंभीर अपराधों, संदिग्ध मौतों, दुर्घटनाओं और मेडिको-लीगल मामलों की निष्पक्ष जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में लंबे समय तक पद खाली रहने से अस्पताल की कार्यप्रणाली और न्यायिक प्रक्रिया दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
स्थानीय लोगों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने राज्य सरकार से जल्द से जल्द फोरेंसिक विशेषज्ञों की नियुक्ति करने की मांग की है, ताकि अस्पताल में फोरेंसिक सेवाएं सुचारु रूप से संचालित हो सकें और मरीजों तथा जांच एजेंसियों को समय पर आवश्यक सहायता मिल सके।