43 साल पहले काशी विश्वनाथ मंदिर से 2.6 किलो सोना चोरी, जानिए देश को झकझोर देने वाली उस घटना की पूरी कहानी

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वाराणसी, 09  जुलाई 2026 । देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल काशी विश्वनाथ मंदिर में करीब 43 वर्ष पहले हुई सोने की चोरी की घटना आज भी चर्चित मामलों में गिनी जाती है। उस समय मंदिर से लगभग 2.6 किलोग्राम सोना चोरी होने की खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया था। यह मामला मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था और बहुमूल्य धार्मिक संपत्तियों की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाला साबित हुआ।

वाराणसी के काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर में जनवरी 1983 में शिवलिंग के चारों ओर बने ‘अर्घा’ (सोने का आधार) से 2.6 किलो सोना चोरी हो गया था। यह घटना इस मंदिर के इतिहास में एक ऐसी घटना थी जिससे मंदिर के प्रबंधन में बड़ा बदलाव हुआ था। इस घटना के बाद यूपी सरकार ने पारंपरिक महंत परिवार से मंदिर का प्रबंधन छीनकर अपने हाथ में ले लिया था। सरकार ने एक ट्रस्ट गठित करके मंदिर का प्रबंधन उसे सौंप दिया था।

काशी में रोज शाम को निकलते थे मशाल जुलूस

काशी में यह घटना सन 1983 में 4 और 5 जनवरी की रात में हुई थी। इस घटना से काशी में भारी आक्रोश फैल गया था। स्थानीय लोग घटना को याद करते हुए बताते हैं कि जब तक पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया और 22 जनवरी 1983 को चोरी हुआ सोना बरामद नहीं हुआ, तब तक रोज सूरज डूबने के बाद छतों से ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे गूंजने लगते थे, घंटियां बजाई जाती थीं और मशाल जुलूस निकाले जाते थे।

बताया जाता है कि चोरी मंदिर में चढ़ाए गए बहुमूल्य स्वर्ण आभूषणों और धातुओं से जुड़ी थी। घटना सामने आने के बाद पुलिस और जांच एजेंसियों ने व्यापक जांच शुरू की। मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई और कई लोगों से पूछताछ की गई। यह मामला लंबे समय तक जांच और कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बना रहा।

इस घटना के बाद देश के कई प्रमुख मंदिरों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया। सीसीटीवी निगरानी, प्रवेश नियंत्रण, बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था, चढ़ावे के बेहतर प्रबंधन और कीमती धरोहरों के सुरक्षित संरक्षण जैसे कई कदम उठाए गए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

हाल के दिनों में विभिन्न मंदिरों में चढ़ावे और दान से जुड़े मामलों की चर्चा के बीच काशी विश्वनाथ मंदिर की यह पुरानी घटना एक बार फिर सुर्खियों में है। हालांकि, यह मामला ऐतिहासिक संदर्भ में देखा जाता है और वर्तमान घटनाओं से इसका प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।

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