हरियाणा , 22 जून् 2026 । हरियाणा सरकार ने ऊर्जा बचत और हरित विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों की छतों पर सोलर पैनल लगाने का बड़ा फैसला किया है। इस पहल का उद्देश्य स्वास्थ्य संस्थानों को स्वच्छ ऊर्जा से जोड़ना, बिजली खर्च कम करना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है।
सीएम सैनी ने रविवार को हरियाणा सिविल सचिवालय में स्वास्थ्य सुविधाओं, सरकारी अस्पतालों के आधुनिकीकरण तथा मेडिकल कॉलेजों के निर्माण कार्यों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए 12 जिलों अम्बाला, भिवानी, चरखी दादरी, फरीदाबाद, हिसार, कैथल, महेंद्रगढ़, पलवल, पंचकूला, रेवाड़ी, सोनीपत और नूंह के जिला अस्पतालों में चल रहे नवीनीकरण कार्यों की समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
सरकार के अनुसार, राज्य के प्रमुख सरकारी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य संस्थानों की छतों पर चरणबद्ध तरीके से सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। इससे इन संस्थानों की बिजली आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा किया जा सकेगा। साथ ही बिजली बिल पर होने वाले खर्च में भी उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में बिजली की निरंतर उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि अस्पतालों में विभिन्न जीवनरक्षक उपकरण, ऑपरेशन थिएटर, लैब और अन्य चिकित्सा सेवाएं चौबीसों घंटे संचालित होती हैं। सोलर पैनलों के माध्यम से ऊर्जा का वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध होने से बिजली आपूर्ति अधिक विश्वसनीय और टिकाऊ बन सकेगी।
यह पहल हरियाणा सरकार की नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। सरकार का लक्ष्य सरकारी संस्थानों में ऊर्जा दक्षता बढ़ाना और कार्बन उत्सर्जन को कम करना है। सौर ऊर्जा के उपयोग से पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और स्वच्छ ऊर्जा के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में सोलर पैनल लगाने से लंबे समय में करोड़ों रुपये की बचत हो सकती है। इसके अलावा, ऊर्जा लागत में कमी आने से संसाधनों का बेहतर उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और गुणवत्ता सुधार में किया जा सकेगा।
हरियाणा सरकार की यह पहल राज्य को हरित ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के साथ-साथ स्वास्थ्य अवसंरचना को अधिक आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में अन्य सरकारी संस्थानों में भी इस तरह की परियोजनाओं का विस्तार किए जाने की संभावना है।