मसूरी, 07 अगस्त 2026 । उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन स्थल मसूरी में रेहड़ी-पटरी कारोबार को व्यवस्थित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। हाईकोर्ट की मंजूरी के बाद अब रेहड़ी और पटरी विक्रेताओं को केवल निर्धारित वेंडिंग जोन में ही कारोबार करने की अनुमति होगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि तय स्थानों के बाहर लगने वाली अवैध रेहड़ियों और अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
रेहड़ी-पटरी समिति ने उठाए थे टाउन वेंडिंग कमेटी पर सवाल
मामला तब शुरू हुआ जब रेहड़ी-पटरी कमजोर वर्ग कल्याण समिति ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर टाउन वेंडिंग कमेटी (TVC) के गठन पर सवाल उठाए। याचिका में नए सिरे से सर्वे कराने और माल रोड सहित अन्य क्षेत्रों में फड़-फेरी की अनुमति देने की मांग की गई थी।
सुनवाई के दौरान नगर पालिका परिषद ने अदालत को बताया कि स्ट्रीट वेंडर्स (जीविका संरक्षण एवं सड़क विक्रय विनियमन) अधिनियम के तहत सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए टाउन वेंडिंग कमेटी का पुनर्गठन किया गया। पात्र वेंडरों का सर्वे कराया गया, उन्हें लाइसेंस जारी किए गए और उनके लिए अलग-अलग वेंडिंग जोन भी तय किए गए।
नई व्यवस्था का उद्देश्य शहर में यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना, पर्यटकों की आवाजाही को आसान बनाना और सार्वजनिक स्थानों पर अनियंत्रित अतिक्रमण को रोकना है। प्रशासन का कहना है कि वेंडिंग जोन तय होने से एक ओर जहां वैध रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को व्यवस्थित स्थान मिलेगा, वहीं दूसरी ओर शहर की सड़कों और बाजारों में भीड़भाड़ और अव्यवस्था पर भी नियंत्रण किया जा सकेगा।
नगर प्रशासन के अनुसार, निर्धारित जोनों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी योजना बनाई जा रही है ताकि छोटे कारोबारियों को अपने व्यवसाय में किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वेंडिंग जोन की व्यवस्था स्ट्रीट वेंडर्स (जीविका संरक्षण एवं सड़क विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014 और संबंधित नियमों के अनुरूप लागू हो।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि तय स्थानों के अलावा कहीं भी अवैध रूप से रेहड़ी-पटरी लगाने, सड़क घेरने या अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए नियमित निरीक्षण अभियान चलाए जाएंगे और जरूरत पड़ने पर अवैध कब्जों को हटाने की कार्रवाई भी की जाएगी।
शहरी विकास विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वेंडिंग जोन की व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो इससे छोटे व्यापारियों के हितों और शहर के यातायात व सौंदर्यीकरण के बीच बेहतर संतुलन स्थापित किया जा सकेगा। साथ ही पर्यटकों को भी अधिक सुव्यवस्थित और सुरक्षित वातावरण मिलेगा।