चंडीगढ़, 07 अगस्त 2026 । कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पंजाब की राजनीति को लेकर दिए एक बयान में पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को भारतीय जनता पार्टी (BJP) में अपना “पसंदीदा नेता” बताया। उनके इस बयान के बाद पंजाब की राजनीति में नई चर्चा शुरू हो गई है। साथ ही, कांग्रेस के भीतर कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच हुए पुराने राजनीतिक मतभेद भी एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं।
राहुल से पूछा गया ये सवाल
राहुल गांधी से जब पूछा गया कि बीजेपी में उनका पसंदीदा नेता कौन है। इसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से कैप्टन अमरिंदर सिंह। मेरी उनसे अच्छी बनती है। वह कूल हैं। उन्होंने आगे कहा कि अमरिंदर सिंह सैन्य इतिहास के अच्छे जानकार हैं और इसी वजह से वह उन्हें काफी पसंद करते हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने बेहद अनौपचारिक अंदाज में कहा, हेलो, अंकल अमरिंदर! राहुल गांधी ने अमरिंदर सिंह की सैन्य इतिहास में रुचि और भारत-पाकिस्तान युद्धों पर उनके लेखन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ने युद्ध और सैन्य इतिहास से जुड़े कई विषयों पर किताबें लिखी हैं। अमरिंदर सिंह भारतीय सेना में अधिकारी रह चुके हैं और 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान भी सेवा दे चुके हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह लंबे समय तक कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में रहे और पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में भी कार्य किया। हालांकि, बाद में पार्टी के अंदर नेतृत्व और संगठनात्मक मुद्दों को लेकर मतभेद सामने आए। इसी दौरान नवजोत सिंह सिद्धू की सक्रियता बढ़ी और कांग्रेस के भीतर दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक टकराव खुलकर सामने आया। अंततः कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस छोड़ दी और बाद में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए।
राहुल गांधी के हालिया बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ राजनीतिक जानकार इसे व्यक्तिगत संबंधों और राजनीतिक सम्मान के संदर्भ में देख रहे हैं, जबकि अन्य इसे पंजाब की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, राहुल गांधी ने अपने बयान में किसी नई राजनीतिक रणनीति या गठबंधन का संकेत नहीं दिया है।
पंजाब की राजनीति में कैप्टन अमरिंदर सिंह, नवजोत सिंह सिद्धू और कांग्रेस के बीच हुए घटनाक्रम ने पिछले कुछ वर्षों में राज्य की राजनीतिक दिशा पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है। नेतृत्व परिवर्तन, संगठनात्मक बदलाव और चुनावी रणनीतियों को लेकर हुए विवादों ने कांग्रेस की आंतरिक राजनीति को लंबे समय तक प्रभावित किया।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चुनावी माहौल में नेताओं के ऐसे बयान अक्सर चर्चा का विषय बनते हैं। हालांकि, किसी भी राजनीतिक टिप्पणी का वास्तविक प्रभाव चुनावी रणनीति, जनता के मुद्दों और दलों की आगामी घोषणाओं पर निर्भर करता है।