गाजियाबाद में पोलियो वायरस मिलने से स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, 12 इलाकों में डेढ़ लाख बच्चों का होगा विशेष सर्वे
गाजियाबाद , 10 जून् 2026 । उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में सीवेज के नमूनों में वैक्सीन-डिराइव्ड पोलियो वायरस (VDPV Type-1) मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिले के 12 संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सर्वे अभियान चलाने का फैसला किया गया है। इस अभियान के तहत करीब डेढ़ लाख बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति और टीकाकरण रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अतिसंवेदनशील 12 इलाकों में डोर टू डोर सर्वे शुरू कर दिया है।
स्वास्थ्य विभाग की टीमों को घर-घर जाकर बच्चों की पहचान करने, उनके टीकाकरण की स्थिति का आकलन करने और किसी भी संदिग्ध लक्षण पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर फोकस किया जाएगा जहां नियमित टीकाकरण का प्रतिशत अपेक्षाकृत कम पाया गया है या जहां बड़ी संख्या में प्रवासी आबादी निवास करती है।
अधिकारियों के अनुसार, सीवेज निगरानी प्रणाली के दौरान वायरस के संकेत मिलने के बाद एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम के तहत पर्यावरणीय निगरानी (Environmental Surveillance) को संक्रमण के संभावित जोखिमों का शुरुआती संकेतक माना जाता है। इसी आधार पर व्यापक सर्वे और निगरानी अभियान शुरू किया गया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पोलियो से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका समय पर टीकाकरण है। जिन बच्चों को नियमित पोलियो वैक्सीन और अन्य आवश्यक टीके मिले हैं, उनमें गंभीर जोखिम की संभावना काफी कम रहती है। इसलिए अभिभावकों से अपील की गई है कि वे टीकाकरण कार्यक्रम में पूरा सहयोग करें और स्वास्थ्य कर्मियों को सही जानकारी उपलब्ध कराएं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह सर्वे एहतियाती उपाय के रूप में किया जा रहा है ताकि किसी भी संभावित खतरे को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित किया जा सके। सर्वे रिपोर्ट और नमूनों की जांच के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और प्रभावित क्षेत्रों में जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
घर-घर जाएंगीं स्वास्थ्य विभाग की 107 टीमें
शहरी पीएचसी के नोडल अधिकारी डॉ आरके गुप्ता ने बताया कि 107 टीमें घर-घर जाकर बच्चों के स्वास्थ्य की जानकारी लेंगी। विशेष रूप से एसटीपी के आसपास की कॉलोनियों में पांच वर्ष तक बच्चों का सर्वे कर बीमार बच्चों का पता लगाया जाएगा। साथ ही टीकाकरण की स्थिति का भी आकलन किया जाएगा।