देहरादून, 01 जून् 2026 । लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का प्रस्तावित उत्तराखंड दौरा केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे कांग्रेस की नई चुनावी रणनीति के अहम हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस अब उन वर्गों तक अपनी पहुंच मजबूत करने की कोशिश कर रही है, जिन्हें लंबे समय से भाजपा का पारंपरिक समर्थन आधार माना जाता रहा है।
कांग्रेस राहुल गांधी के 4 और 5 जून को उत्तराखंड दौरे को लेकर उत्साहित है। साथ ही उत्तराखंड की सत्ता में वापसी के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। इसके लिए कांग्रेस कई समय से रणनीति पर काम कर रही है। राहुल गांधी का उत्तराखंड दौरा भी उसी रणनीति का सबसे बड़ा हिस्सा माना जा रहा है। राहुल गांधी दो दिन उत्तराखंड में रहेंगे। राहुल गांधी 4 जून को कुमाऊं के अल्मोड़ा, गढ़वाल के मुख्यालय पौड़ी गढ़वाल और 5 जून को राजधानी देहरादून में कई कार्यक्रमों में शिरकत करेंगे। इस तरह कांग्रेस की रणनीति दो दिन में राहुल गांधी के कार्यक्रमों के जरिए सभी सियासी मुद्दे और सभी बिंदुओं को छुने की है।
उत्तराखंड को देश के उन राज्यों में गिना जाता है जहां बड़ी संख्या में सैनिक, पूर्व सैनिक और सैन्य परिवार रहते हैं। राज्य की कई विधानसभा सीटों पर सैन्य पृष्ठभूमि वाले मतदाताओं का प्रभाव महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में राहुल गांधी का दौरा केवल संगठनात्मक मजबूती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे सैनिक और पूर्व सैनिक समुदाय के बीच राजनीतिक संवाद बढ़ाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।
कांग्रेस की रणनीति का एक बड़ा उद्देश्य कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरना और राज्य में संगठन को सक्रिय करना भी माना जा रहा है। पिछले कुछ समय से पार्टी लगातार जनसंपर्क अभियानों, यात्राओं और जमीनी कार्यक्रमों के जरिए अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रही है। राहुल गांधी की सक्रिय भागीदारी को इसी अभियान का विस्तार माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, भाजपा लंबे समय से राष्ट्रवाद, सैन्य सम्मान और पूर्व सैनिकों से जुड़े मुद्दों पर मजबूत पकड़ बनाए हुए है। ऐसे में यदि कांग्रेस सैनिक परिवारों और युवाओं के बीच प्रभावी संवाद स्थापित करने में सफल होती है, तो यह भविष्य की चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। हालांकि भाजपा भी राज्य में अपने संगठन और जनाधार को मजबूत बनाए रखने के लिए लगातार सक्रिय है।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, भाजपा लंबे समय से राष्ट्रवाद, सैन्य सम्मान और पूर्व सैनिकों से जुड़े मुद्दों पर मजबूत पकड़ बनाए हुए है। ऐसे में यदि कांग्रेस सैनिक परिवारों और युवाओं के बीच प्रभावी संवाद स्थापित करने में सफल होती है, तो यह भविष्य की चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। हालांकि भाजपा भी राज्य में अपने संगठन और जनाधार को मजबूत बनाए रखने के लिए लगातार सक्रिय है।