बंगला विवाद पर सियासी घमासान, मंत्री के दलित संबंधी बयान पर रोहिणी आचार्य का तीखा पलटवार

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बिहार , 01 जून्‌ 2026 । बिहार में सरकारी बंगले को लेकर चल रहा विवाद अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के नए दौर में प्रवेश कर गया है। इस बीच एक मंत्री द्वारा दिए गए दलित समाज से जुड़े बयान पर राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया। बयान सामने आने के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) से जुड़ीं रोहिणी आचार्य  ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे आपत्तिजनक और समाज को विभाजित करने वाला बताया।

 सम्राट चौधरी सरकार ने ये बंगला राज्य के नए डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित किया है। राबड़ी देवी द्वारा आवास खाली न करने पर मंत्री नंद किशोर राम ने भावुक बयान देते हुए कहा था कि उनका ‘दलित’ होना ही शायद उनके लिए अभिशाप बन गया है। इस बयान के बाद राजद और भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्या ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक लंबा पोस्ट लिखकर सरकार और मंत्री पर करारा हमला बोला है।

रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों के जरिए मंत्री के बयान पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन किसी भी समुदाय या वर्ग को लेकर की गई टिप्पणी लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं मानी जा सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के बयान सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करते हैं और राजनीतिक लाभ के लिए संवेदनशील मुद्दों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

विवाद की जड़ में सरकारी बंगले से जुड़ा मुद्दा बताया जा रहा है, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। मंत्री के बयान के बाद विपक्ष ने इसे दलित समाज के सम्मान से जोड़ते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की है। वहीं, सत्ता पक्ष के नेताओं का कहना है कि उनके बयान को संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत किया जा रहा है और विपक्ष इसे राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बिहार में सामाजिक समीकरण और जातीय राजनीति हमेशा चुनावी विमर्श का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। ऐसे में किसी भी नेता का बयान तेजी से राजनीतिक बहस का विषय बन जाता है। बंगला विवाद अब केवल आवास के मुद्दे तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक और राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनता जा रहा है।

आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। विपक्ष जहां इसे जनभावनाओं और सामाजिक सम्मान से जोड़कर उठाने की तैयारी में है, वहीं सरकार और सत्ता पक्ष अपने रुख को सही साबित करने में जुटे हुए हैं।

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