NCRB रिपोर्ट में बच्चों के खिलाफ अपराधों को लेकर बड़ा खुलासा, मानवाधिकार आयोग ने जताई गंभीर चिंता

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हरियाणा , 21 मई 2026 । राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की हालिया रिपोर्ट में बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार देश में नाबालिगों के खिलाफ अपराधों के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिसके बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने राज्यों और संबंधित एजेंसियों से बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम उठाने को कहा है।

मानवाधिकार आयोग ने NCRB के आंकड़ों का हवाला देते हुए गहरी चिंता व्यक्त की है। रिपोर्ट के अनुसार देश भर में मासूम बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों (जैसे यौन उत्पीड़न, अपहरण, मानव तस्करी और घरेलू हिंसा) के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। रिपोर्ट के आंकड़े यह साफ दर्शाते हैं कि कड़े कानूनों (जैसे पॉक्सो एक्ट) के बावजूद जमीनी स्तर पर बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करने में कमियां रह गई हैं।

रिपोर्ट में अपहरण, यौन शोषण, बाल तस्करी, घरेलू हिंसा और ऑनलाइन अपराध जैसे मामलों में वृद्धि को लेकर चिंता जताई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधों का खतरा भी बच्चों तक तेजी से पहुंच रहा है। वहीं कई मामलों में सामाजिक जागरूकता की कमी और रिपोर्टिंग में देरी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि बच्चों की सुरक्षा केवल कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। आयोग ने स्कूलों, अभिभावकों और प्रशासन को मिलकर बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करने की जरूरत पर जोर दिया है। साथ ही राज्यों से संवेदनशील मामलों की निगरानी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों के खिलाफ अपराधों में वृद्धि के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें सामाजिक असुरक्षा, इंटरनेट का गलत इस्तेमाल, पारिवारिक तनाव और जागरूकता की कमी शामिल हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई मामलों में पीड़ित परिवार कानूनी प्रक्रिया और सामाजिक दबाव के कारण शिकायत दर्ज कराने से बचते हैं।

बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने सरकार से स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, साइबर जागरूकता अभियान चलाने और बच्चों के लिए हेल्पलाइन सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि बच्चों के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए केवल कानून बनाना काफी नहीं, बल्कि उनका सख्ती से पालन भी जरूरी है।

यह मुद्दा अब राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। मानवाधिकार आयोग की सख्ती के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में बच्चों की सुरक्षा को लेकर नई नीतियां और कड़े कदम सामने आ सकते हैं।

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