मनरेगा कार्यों में लापरवाही पर सरकार सख्त, जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का वेतन रोका गया
बिहार , 21 मई 2026 । बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के उप विकास आयुक्त डॉ. प्रदीप कुमार ने मनरेगा के तहत रोजगार सृजन में विफल रहने एवं जल संरक्षण, जल संचय, प्लांटेशन, नहर, आहर और पाइन जैसी योजनाओं में नगण्य प्रगति के कारण जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के वेतन भुगतान पर रोक लगाते हुए उनसे स्पस्टीकरण तलब किया है। इस फैसले के बाद विभागीय स्तर पर हड़कंप मच गया है और अन्य अधिकारियों को भी कार्यों में पारदर्शिता और समयबद्धता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
उप विकास आयुक्त ने बताया कि समीक्षा में मनरेगा के तहत जल संरक्षण, जल संचय, प्लांटेशन, नहर, आहर और पाइन जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही उजागर हुई है और महज 14 प्रतिशत मानव दिवसों का सृजन किया जा सका है। खुद नोडल पदाधिकारी को नहीं पता कि विभाग की कितनी योजनाएं धरातल पर शुरू हुई हैं और कितनी योजनाओं पर मस्टर रोल (एमआर) जारी हो रहा है। यह अत्यंत खेदजनक स्थिति है, जिसके कारण वेतन रोकने और स्पस्टीकरण मांगने जैसे कठोर निर्णय लेने पड़े।’
सूत्रों के अनुसार मनरेगा के तहत चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान कई परियोजनाओं में देरी, निगरानी की कमी और रिकॉर्ड में गड़बड़ियां सामने आई थीं। इसके बाद उच्च अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों से जवाब तलब किया। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर वेतन रोकने की कार्रवाई की गई।
प्रशासन का कहना है कि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना गरीब और ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार का बड़ा माध्यम है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि विकास कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण जारी रहेगा।
बताया जा रहा है कि कई क्षेत्रों में जल संरक्षण, तालाब निर्माण और सिंचाई से जुड़े कार्य समय पर पूरे नहीं हो पाए थे। कुछ जगहों पर दस्तावेजी रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति में भी अंतर पाया गया। इसके बाद संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए यह कार्रवाई की गई।
ग्रामीण विकास से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि मनरेगा के तहत होने वाले कार्य सीधे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार से जुड़े होते हैं। ऐसे में यदि परियोजनाओं में देरी या गड़बड़ी होती है तो इसका असर मजदूरों और किसानों दोनों पर पड़ता है। इसलिए जवाबदेही तय करना जरूरी है।
सरकार ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में अन्य विभागों में भी योजनाओं की समीक्षा तेज की जाएगी और लापरवाही पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस कदम को प्रशासनिक जवाबदेही मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।