हरियाणा, 16 अप्रैल 2026 । हरियाणा की राजनीति में एक नया विवाद सामने आया है, जहां पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा की कोठी से जुड़े पीनल रेंट (दंडात्मक किराया) माफी के मुद्दे पर पेंच फंस गया है। इस फैसले को लेकर सरकार के भीतर ही मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।
गौरतलब है कि साल 2019 में कांग्रेस की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को नेता प्रतिपक्ष का पद मिला था। नेता प्रतिपक्ष को कैबिनेट रैंक का दर्जा होता है। ऐसे में उन्हें सैक्टर-7 में 70 नंबर कोठी अलॉट की गई थी। इस कोठी में पिछले 5 वर्षों से कांग्रेस की गतिविधियां संचालित हो रही थी। इससे पहले वर्ष 2014 से 2019 तक हुड्डा चंडीगढ़ के सैक्टर-3 स्थित एम.एल.ए. फ्लैट में रहते थे।
सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा पीनल रेंट माफ करने के प्रस्ताव पर कैबिनेट के तीन मंत्रियों ने आपत्ति दर्ज कराई है। उनका मानना है कि इस तरह की राहत देने से गलत संदेश जाएगा और सरकारी नियमों की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं। मंत्रियों ने इस मामले में पारदर्शिता और स्पष्ट नियमों के पालन की आवश्यकता पर जोर दिया है।
यह मामला उस समय उठा जब हुड्डा को आवंटित सरकारी आवास को निर्धारित समय के बाद भी खाली न करने पर पीनल रेंट लगाया गया था। अब इस बकाया राशि को माफ करने का प्रस्ताव सामने आने के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साध रहे हैं और इसे विशेष लाभ देने का मामला बता रहे हैं। वहीं, हुड्डा समर्थकों का कहना है कि यह निर्णय नियमों के तहत लिया जा सकता है और इसमें कोई अनियमितता नहीं है।
सरकार के भीतर उठे इस मतभेद के चलते अब यह मामला और पेचीदा हो गया है। संभावना है कि इस पर अंतिम निर्णय लेने से पहले कानूनी और प्रशासनिक राय ली जाएगी, ताकि किसी तरह के विवाद से बचा जा सके।
यह पूरा घटनाक्रम हरियाणा की राजनीति में नई हलचल पैदा कर रहा है, जहां एक ओर नियमों की व्याख्या को लेकर बहस है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है।