चंडीगढ़ , 16 अप्रैल 2026 । देश में शिक्षा के स्तर को आधुनिक और प्रभावी बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने एक नई पहल शुरू की है, जिसके तहत स्कूलों में पढ़ाई का तरीका पूरी तरह बदलने की तैयारी है। इस पहल का उद्देश्य बच्चों को केवल किताबों तक सीमित न रखकर उन्हें डिजिटल युग के अनुरूप कौशल प्रदान करना है।
इस कार्यक्रम के तहत बच्चों को न केवल पारंपरिक पढ़ाई कराई जाएगी, बल्कि उन्हें डिजिटल संचार के आधुनिक माध्यमों से भी परिचित कराया जाएगा। प्राथमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों को व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे प्लेटफार्मों पर संदेश भेजना, इमोजी आधारित संवाद करना और वॉयस नोट्स का उपयोग करना सिखाया जाएगा।
नई योजना के तहत छात्रों को कंप्यूटर, टैबलेट, स्मार्ट बोर्ड और विभिन्न डिजिटल टूल्स के माध्यम से पढ़ाया जाएगा। क्लासरूम को इंटरैक्टिव और आकर्षक बनाने के लिए मल्टीमीडिया कंटेंट, वीडियो लेक्चर और गेम-आधारित लर्निंग का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे बच्चे आसानी से जटिल विषयों को समझ सकें।
इसके अलावा, छात्रों को बेसिक कोडिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा हैंडलिंग जैसी तकनीकी स्किल्स से भी परिचित कराया जाएगा। इससे न केवल उनकी सोचने-समझने की क्षमता बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में रोजगार के बेहतर अवसर भी मिल सकेंगे।
शिक्षकों के लिए भी विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किए जाएंगे, ताकि वे नई तकनीकों का सही तरीके से उपयोग कर सकें और छात्रों को प्रभावी ढंग से पढ़ा सकें। इस पहल में डिजिटल कंटेंट डेवलपमेंट और ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म्स का भी बड़ा योगदान रहेगा।
सरकार का मानना है कि इस तरह की पहल से शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, गुणवत्ता और पहुंच—तीनों में सुधार होगा। खासकर ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों के छात्रों को इसका सबसे ज्यादा लाभ मिलेगा, जहां संसाधनों की कमी के कारण गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच सीमित रहती है।
कुल मिलाकर, यह पहल शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, तकनीक-सक्षम और भविष्य उन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो आने वाली पीढ़ी को डिजिटल दुनिया के लिए तैयार करेगी।