डिजिटल जनगणना की शुरुआत—उत्तराखंड में ‘स्व-गणना’ मॉडल से पारदर्शिता और भागीदारी को बढ़ावा

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देहरादून,  11 अप्रैल 2026 । उत्तराखंड में जनगणना प्रक्रिया के प्रथम चरण की औपचारिक शुरुआत हो गई है, जो इस बार कई मायनों में खास है। राज्यपाल और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद ‘स्व-गणना’ (Self Enumeration) के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर इस अभियान का शुभारंभ किया। यह कदम डिजिटल भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिसमें नागरिकों को खुद अपनी जानकारी ऑनलाइन भरने का अवसर दिया जा रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि स्व-गणना की यह सुविधा 10 अप्रैल से 24 अप्रैल तक उपलब्ध रहेगी और इसके पश्चात 25 अप्रैल से 24 मई तक गणना कर्मी घर-घर जाकर आंकड़े इकटठा करेंगे। इस मौके पर राज्यपाल ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि राज्य के विकास की आधारशिला है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे स्व-गणना के माध्यम से इस महत्वपूर्ण अभियान में सक्रिय सहभागिता करें, जिससे आंकड़ों की सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके।

‘स्व-गणना’ प्रणाली का उद्देश्य जनगणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सटीक और सहभागी बनाना है। इसके तहत नागरिक एक निर्धारित पोर्टल या ऐप के माध्यम से अपनी व्यक्तिगत, सामाजिक और आर्थिक जानकारी स्वयं दर्ज कर सकते हैं। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि डेटा की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।

सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से जनगणना प्रक्रिया में तकनीकी दक्षता आएगी और पारंपरिक तरीकों में होने वाली त्रुटियों को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। इसके साथ ही, डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए डेटा संग्रहण से विश्लेषण और नीति निर्माण में भी तेजी आएगी।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट और डिजिटल साक्षरता की कमी एक चुनौती हो सकती है। ऐसे में सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी वर्गों के लोग इस प्रक्रिया में समान रूप से भाग ले सकें।

जनगणना किसी भी देश की विकास नीतियों का आधार होती है, क्योंकि इससे जनसंख्या, शिक्षा, रोजगार और संसाधनों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है। उत्तराखंड में ‘स्व-गणना’ की यह पहल भविष्य में अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है।

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