पटना , 02 अप्रैल 2026 । बिहार की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है, जहां Nitish Kumar के राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने की तारीख तय हो गई है। इस फैसले ने राज्य के सियासी गलियारों में नई हलचल पैदा कर दी है और आने वाले समय में राजनीतिक समीकरणों में बदलाव के संकेत भी मिल रहे हैं।
नीतीश कुमार बीते 16 मार्च को निर्विरोध राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। उच्च सदन में जाने की प्रक्रिया के तहत उन्होंने 30 मार्च को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से अपना इस्तीफा सौंप दिया था। अब 10 अप्रैल को शपथ ग्रहण के साथ ही उनका आधिकारिक कार्यकाल शुरू हो जाएगा। नीतीश कुमार से पहले बिहार की राजनीति में लालू प्रसाद यादव, उपेंद्र कुशवाहा और दिवंगत सुशील कुमार मोदी ही ऐसे नेता रहे हैं जिन्होंने चारों सदनों के सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं।
सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार निर्धारित तारीख को संसद में राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे। यह कदम उनके राजनीतिक करियर में एक नई दिशा के रूप में देखा जा रहा है, खासकर तब जब बिहार की राजनीति पहले से ही कई उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़े रणनीतिक संकेत छिपे हो सकते हैं। इससे यह अटकलें भी तेज हो गई हैं कि क्या वह राष्ट्रीय राजनीति में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी कर रहे हैं या फिर बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की कोई योजना बन रही है।
विपक्षी दलों ने इस कदम को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं, वहीं समर्थकों का कहना है कि यह निर्णय पार्टी और राज्य के हित में लिया गया है। इस बीच, Janata Dal (United) (JDU) के अंदर भी इस फैसले को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
अब सभी की नजरें उस दिन पर टिकी हैं जब नीतीश कुमार राज्यसभा में शपथ लेंगे। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस कदम के बाद बिहार और राष्ट्रीय राजनीति में क्या नए समीकरण बनते हैं और इसका आगामी चुनावों पर क्या असर पड़ता है।